
लगता है बिहार के युवाओं में धीरे धीरे अफसरशाही को लेकर क्रेज कम होने लगा है। ये हम नहीं कह रहे हैं बल्कि आंकड़े गवाह दे रहे हैं । जिस परीक्षा को पास करने के लिए छात्र दिन रात कड़ी मेहनत करते हैं . कड़ी मशक्कत के बाद सफलता हाथ लगती है। जब वो बीडीओ बन जाते हैं तो उनका भ्रम टूटने लगता है. यही कारण है कि अब सफल युवा बीडीओ की नौकरी छोड़कर दूसरी नौकरी को प्राथमिकता दे रहे हैं ।
20 से अधिक ने दिया इस्तीफा
साल 2019 में 20 से ज्यादा ग्रामीण विकास पदाधिकारी सह प्रखंड विकास पदाधिकारियों ( BDO) ने इस्तीफा दे दिया है। इनमें से अधिक लोगों ने शिक्षा को चुना। वे असिस्टेंट प्रोफेसर (Assistant Professor) बने। बाकी अधिकारियों ने बिहार लोक सेवा आयोग की अन्य प्रतियोगिताओं के जरिए अन्य पदों पर जाना पसंद किया।
इन अफसरों ने दिया इस्तीफा
श्रीमती हुस्न आरा, तौकीर हाशमी, रुपेंद्र कुमार झा, पंकज कुमार, रतन कुमार दास जैसे कुछ नाम इन पदाधिकारियों के हैं। ये सब किसी न किसी प्रखंड में पदाधिकारी थे। राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बहाल हो गए। इसी तरह अमरेश कुमार, श्रीमती आरुप और मारकंडेय राय जैसे अधिकारी हैं, जो आयोग की परीक्षाओं में शामिल होकर अन्य पदों पर चले गए। हां, नौकरी छोडऩे के एवज में उन्हें आर्थिक क्षति भी उठानी पड़ी। उनपर राज्य सरकार ने जो कुछ खर्च किया था, उसकी वसूली की गई।
क्यों छोड़ रहे BDO की नौकरी
प्रखंड विकास पदाधिकारी की तुलना में असिस्टेंट प्रोफेसर की तनख्वाह अधिक है। मगर, नौकरी बदलने की ये इकलौती वजह नहीं है। अफसरी छोड़ असिस्टेंट प्रोफेसर बने एक पूर्व बीडीओ का कहना था प्रशासन में काम का बोझ (Work Load) अधिक है। राज्य और केंद्र सरकार की शायद ही ऐसी कोई योजना है, जो प्रखंड के रास्ते से नहीं गुजरती है। प्रखंडों में काम बढ़ा है, लेकिन उस लिहाज से कार्यबल नहीं बढ़ा है। नतीजा यह है कि कम उम्र में ही यह अफसरी उम्र भर चलने वाली बीमारियां दे देती हैं। इसके अलावा जनप्रतिनिधियों की गैर-जरूरी दखलंदाजी भी परेशान करती है।
क्या कहते हैं मंत्री
बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार भी मानते हैं कि प्रखंड अधिकारियों पर काम का बोझ अधिक है। सरकार कोशिश कर रही है कि कार्यबल बढ़े। इसमें समय लगेगा। पदाधिकारियों की रिक्तियां जल्द भर दी जाएंगी। आयोग ने दो किस्तों में 35 ग्रामीण विकास पदाधिकारियों की बहाली की अनुशंसा की है। प्रक्रिया पूरी करने के बाद इन्हें तैनात किया जाएगा।