
नालंदा का इतिहास काफी पुराना है. इसके प्रमाण समय समय पर खुदाई के दौरान मिलने वाली मूर्तियों और पुरातात्विक साक्ष्य मिलते रहते हैं. ऐसे ही एक और साक्ष्य तालाब की खुदाई के दौरान मिला है .
क्या है मामला
नालंदा जिला के चंडी थाना के रूखाई गांव में तालाब खुदाई के दौरान काले पत्थर की प्राचीन खंडित प्रतिमा मिली है।प्रतिमा को देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई. हालांकि, प्रतिमा की पहचान नहीं हो सकी है। लोग पहचानने की कोशिश में लगे हैं। कोई भगवान बुद्ध की मूर्ति बता रहे तो कोई किसी राजा की।
ईंट की दीवार भी मिली
जिस जगह ये प्रतिमा मिली है उससे करीब 100 फीट की दूरी पर खुदाई के दौरान प्राचीन काल की ईंट से बनी दीवार तथा चौड़ी पतली ईंटे निकल रही है। प्राचीन मूर्ति और दीवार मिलने से लोग जमीन के नीचे किसी प्राचीन इतिहास के दफन होने की चर्चा कर रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि हो सकता है कि एक तालाब से दूसरे तालाब में जाने के लिए पुल बनाया गया होगा जो बाद में नष्ट हो गया। वहीं कुछ लोग प्राचीन मंदिर के बात कह रहे .
रुखाई गांव का इतिहास
रुखाई गांव के बारे में कहा जाता है कि यहां पांच बड़े खाई थे। कई के अवशेष आज भी मौजूद हैं। यहां भगवान बुद्ध के आगमन की चर्चा है। ये क्षेत्र नालंदा –पाटलिपुत्र अंतर्गत आता था। इसी गांव के पास टील्हा पर चीनी यात्री फाहियान के ठहरने की भी बात कही जाती है। रूखाई गढ़ टील्हे की खुदाई में उतरीय कृष्ण मार्जित मृदभाण्ड (एनबीपीडब्लू) मिले है। इसे प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति से जोड़कर देखा जाता है। इन मृदभाण्डो की मदद से समकालीन इतिहास के सामाजिक -आर्थिक पक्षों पर रोशनी पड़ने की संभावना है।
200 से 600 ईसा पूर्व तक का इतिहास
मृदभाण्डो को 200 ईसा पूर्व से लेकर 600 ईसा पूर्व काल तक जोड़कर देखा जाता है। यहां से उत्खनन में ठिकड़े (मिट्टी के बर्तन), मानव हड्डी, रिंग वेल, अनाज के दाने, मिट्टी का फर्श, मिट्टी के मनके, चित्रित धूसर मृदभाण्ड, सल्तनत काल के सिक्के, नगरीय व्यवस्था के अवशेष, पांच कमरों का मकान सहित कई अवशेष मिले है। प्राप्त अवशेष के काल निर्धारण के लिए खुदाई में मिली सामग्री को पुणे के डेक्कन कॉलेज, लखनऊ के बीरबल-साहनी, हैदराबाद और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय भेजने की बात कही गयी थी।