Home राजनीति चिट्ठी पर सियासत के बीच रघुवंश बाबू की हालत नाजुक.. दुआओं की जरूरत

चिट्ठी पर सियासत के बीच रघुवंश बाबू की हालत नाजुक.. दुआओं की जरूरत

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पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह (Raghuvansh Prasad Singh) दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती हैं. उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है. उन्हें एम्स में वेंटिलेटर पर रखा गया है. रघुवंश प्रसाद सिंह कोरोना संक्रमण से ठीक हो गए थे लेकिन वो पूरी तरह स्वस्थ्य नहीं हो पाए थे. जिसके बाद उन्हें दिल्ली के एम्स में एडमिट कराया गया था.

दिल्ली एम्स में भर्ती हैं रघुवंश बाबू
रघुवंश बाबू को कोरोना हो गया था. जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए पटना एम्स में भर्ती कराया गया था. पटना एम्स में उनका कोरोना संक्रमण ठीक हो गया था. लेकिन सांस लेने में तकलीफ की समस्या बरकरार थी. जिसके बाद दिल्ली एम्स में भर्ती कराया गया था. रघुवंश प्रसाद सिंह के बेटे सत्य प्रकाश सिंह के मुताबिक डॉक्टरों ने एक-दो दिनों में तबीयत में सुधार होने की उम्मीद जताई है.

शुरू हुआ चिट्ठी और जवाबी चिट्ठी का सिलसिला
दिल्ली एम्स से ही रघुवंश प्रसाद सिंह ने लालू प्रसाद यादव को चिट्ठी लिखकर अपना इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद चिट्ठी का सिलसिला शुरू हुआ. सबसे पहले रघुवंश बाबू ने लालू यादव को चिट्ठी लिखकर इस्तीफे की बात कही

रघुवंश बाबू ने दिया था इस्तीफा
रघुवंश प्रसाद सिंह ने सबसे पहले लालू को इस्तीफा भेजा था। अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा था, ‘‘जन नायक कर्पूरी ठाकुर के निधन के बाद 32 साल तक आपके पीठ पीछे खड़ा रहा, लेकिन अब नहीं। पार्टी, नेता, कार्यकर्ता और आमजन का बड़ा स्नेह मिला, मुझे क्षमा करें।’’

लालू यादव ने लिखी जवाबी चिट्ठी
रघुवंश बाबू के इस्तीफे पर लालू ने पत्र लिखकर उन्हें मनाने की कोशिश की। अपने पत्र में लालू ने लिखा था कि प्रिय रघुवंश बाबू। आपके द्वारा कथित तौर पर लिखित एक चिट्ठी मीडिया में चलाई जा रही है। मुझे तो विश्वास ही नहीं होता। अभी मेरे परिवार और मेरे साथ मिलकर रहिए। राजद परिवार आपको शीघ्र स्वस्थ होकर अपने बीच देखना चाहता है। चार दशकों में हमने हर राजनीतिक सामाजिक और यहां तक कि पारिवारिक मामलों में भी मिल बैठकर ही विचार किया है। आप जरूर स्वस्थ हों फिर बैठ के बात करेंगे। आप कहीं नहीं जा रहे हैं! समझ लीजिए।

फिर रघुवंश बाबू ने लिखी चिट्ठी
रघुवंश सिंह ने लालू जी की चिट्ठी का जवाब नहीं देकर एक संदेश “संदर्भ” नाम से जारी किया है। इस चिट्ठी के जरिये रघुवंश ने साफ लिखा है कि बापू, जेपी, लोहिया, अंबेडकर और कर्पूरी की जगह एक परिवार के पांच की तस्वीर उन्हें बर्दाश्त नहीं।
रघुवंश के लेटरहेड पर सामने आई इस संदेश का शीर्षक है-“राजनीति मतलब बुराई से लड़ना, धर्म मतलब अच्छा करना”।

रघुवंश बाबू की संदर्भ में क्या लिखा है
रघुवंश बाबू ने संदर्भ में लिखा कि “वर्तमान में राजनीति में इतनी गिरावट आ गई है, जिससे लोकतंत्र पर खतरा है। कुछ पार्टियों द्वारा सीटों की, टिकट की खरीद-बिक्री, वोटों की खरीद-बिक्री से कार्यकर्ताओं की हकमारी हो रही है। लोकतंत्र पर ही खतरा है क्योंकि लोकतंत्र मतलब वोट का राज और वोट प्रणाली ही चौपट जाए तो लोकतंत्र कैसे बचेगा। महात्मा गांधी, बाबू जय प्रकाश नारायण, डॉ लोहिया, बाबा साहब और जननायक कर्पूरी ठाकुर के नाम और विचारधारा पर लाखों लोग रहे, कठिनाइयां सही लेकिन डगमग नहीं हुए। समाजवाद की जगह सामंतवाद जातवाद, वंशवाद, परिवारवाद, सांप्रदायवाद आ गया। यह सभी उतनी ही बुराई है जिसके खिलाफ समाजवाद का जन्म हुआ था। उपरोक्त पांचों महान पुरुष की फोटो की जगह एक ही परिवार के पांच का छपने लगा। पद हो जाने से धन कमाना और धन कमाकर ज्यादातर लोग पद खोज रहे हैं। राजनीति की परिभाषा के अनुसार इन सभी बुराइयों से लड़ना ही पड़ेगा।” उसी दिन उन्होंने राजनीति में आई गिरावट पर चिट्ठी लिखी थी. इस खत में उन्होंने लोकतंत्र को खतरे में बताया था.

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