
बिहार सरकार ने एमआर यानि मेडिकल रिप्रजेंटेटिव पर शिकंजा कस दिया है। अब पावापुरी मेडिकल कॉलेज समेत सूबे के मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में मेडिकल रिप्रजेंटेटिव (एमआर) के प्रवेश पर रोक लगा दिया है। विभाग ने सभी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और अधीक्षक को इस बारे में पत्र लिखा है।
‘डॉक्टरों नहीं लिखेंगे बाहरी दवाई’
स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में बाहर की दवा ना लिखने का निर्देश दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉक्टर बिहार मेडिकल सर्विसेज आधारभूत कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा उपलब्ध दवाएं ही लिखने को कहा है। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग को शिकायत मिली थी कि मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में मरीजों को अस्पताल में उपलब्ध दवा न देकर एमआर द्वारा अनुशंसित दवाएं लिखी जा रही हैं। बाहर की दवाएं काफी महंगी होती हैं और मरीजों पर आर्थिक बोझ पड़ता है, इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में एमआर के प्रवेश पर रोक लगा दिया है। इतना ही नहीं स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक अगर कोई एमआर मेडिकल कॉलेज कैंपस में पकड़ा जाएगा तो उसपर कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
अब सवाल ये उठता है कि ये सिर्फ कागजी फरमान है या इस पर अमल होता है ? नालंदा लाइव भी जिला वासियों से अपील करता है कि अगर मेडिकल कॉलेज में अगर बाहर की दवा लिखी जाती है तो आप इसकी शिकायत कर सकते हैं। हम आपकी आवाज बनेंगे।