
नालंदा जिला के बाल अपराधियों को अब पटना भेजने की जरूरत नहीं रही। क्योंकि अब बिहारशरीफ में ही रिमांड होम खुल गया है। ये बाल सुधार गृह बिहारशरीफ के डीटीओ ऑफिस के बगल चकरलसपुर में बनाया गया है। जिसमें 50 बच्चों को रखने की व्यवस्था की गई है। अभी पटना के बाल सुधार गृह से 22 बच्चों को लाया गया है जो किसी मामले में आरोपी थे।
नवादा और जहानाबाद के भी बाल अपराधियों को रखा जाएगा
बिहारशरीफ के चकरलसपुर में स्थित बाल सुधार गृह में नालंदा ही नहीं नवादा और जहानाबाद के बाल अपराधियों को भी रखा जाएगा। इसे बनाने में करीब 6 करोड़ रुपए का खर्च आया है। ये बाल सुधार गृह अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। इस पर्यवेक्षण गृह में बच्चों को समाज के मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शिक्षा, खेलकूद के साथ योगा भी सिखाया जाएगा।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
बाल सुधार गृह में सुरक्षा का पूरा इंतजाम किया गया है। यहां 15 होमगार्ड, 1-4 डीएपी लगाए गए हैं। इसके अलावा तीन यांत्रिक सुरक्षा गार्ड के साथ-साथ सुरक्षा से संबंधित सभी आवश्यक इंतजाम है।
बच्चों को सुधारने की होगी कोशिश
जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत सजा पाए बाल एवं किशोर अपराधियों की प्रवृति यहां सुधारने की कोशिश होगी। यहां मेडिटेशन का कार्यक्रम भी चलाया जायेगा। मनोविज्ञान के शिक्षक को लाने का प्रयास किया जा रहा है। जो बच्चे पढ़ना चाहते हैं उसकी भी व्यवस्था की गई है। आउटडोर, इनडोर खेल के साथ पुस्तकालय की भी व्यवस्था है। शिक्षक, स्किल डेवलपमेंट, फिजिकल फिटनेस, स्वास्थ्य आदि की सुविधा के लिए संबंधित पदाधिकारियों को कहा गया है। उन्होंने बताया कि एसपी को कोर्ट में बच्चों की उपस्थिति के लिए सुरक्षा और वाहन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।
शिक्षक की व्यवस्था करने को कहा गया
वैसे बाल या किशोर जो पढ़ाई-लिखाई नहीं कर सकते उनके स्किल डेवलपमेंट के लिए सुविधा दी जाएगी। जैसे मोमबत्ती, माचिस आदि बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। ऐसे बच्चों के कौशल विकास के लिए जिला बाल संरक्षण इकाई को व्यवस्था करने के लिए कहा गया है। साथ ही बच्चों के फिजिकल फिटनेस को ध्यान में रखते हुए योग्य शिक्षक की व्यवस्था करने के लिए भी कहा गया है।