
जेडीयू के राज्यसभा सांसद और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है. विपक्ष ने उपसभापति हरिवंश पर लोकतांत्रिक परंपराओं को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है.
क्या है पूरा मामला
दरअसल, रविवार को राज्यसभा में किसानों से संबंधित दो बिल पेश किए गए. जिसके बाद सदन में जमकर हंगामा हुआ. जिसके कारण मार्शल तक बुलाना पड़ा. 10 मिनट बाद सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई और सरकार ने ध्वनिमत से दोनों विधेयकों को सदन से पारित करा लिया.
बिल पास होने से विपक्ष नाराज
बिल के पास होने के बाद विपक्ष राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आया है. कांग्रेस सांसद अहमद पटेल ने कहा कि उप सभापति को लोकतांत्रिक परंपराओं की रक्षा करनी चाहिए, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और परंपराओं को नुकसान पहुंचाया. इसी वजह से उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है.
माइक तोड़ने की कोशिश
बिल पास होने से पहले विपक्ष ने सदन में भारी हंगाम किया. हंगामे के बीच कई माइक भी तोड़े गये हैं. तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने उप सभापति के माइक को तोडने की कोशिश की. साथ ही सदन के रुल बुक को फाड़ दिया. दरअसल डेरेक ओ ब्रायन दोनों विधेयकों को प्रवर समिति में भेजे जाने की मांग की थी, जिसे उपसभापति ने स्वीकार नहीं किया. जिसके बाद ब्रायन ने यह आरोप लगाया कि सरकार ने इन विधेयकों के संबंध में राज्यों से मशविरा नहीं किया गया. यह लोकतंत्र की हत्या है.
जेडीयू ने किया समर्थन
जद (यू) के आरसीपी सिंह ने राम चंद्र प्रसाद सिंह ने विधेयकों का समर्थन करते हुए कहा कि लंबे समय बाद किसानों के लिए कोई नीति आयी है. उन्होंने कहा कि 1991 में देश में उदारीकरण की शुरूआत की गई लेकिन कृषि सुधार नहीं हो सका. उन्होंने बिहार का हवाला दिया जहां नीतीश कुमार सरकार ने 2006 में एपीएमसी कानून को समाप्त कर दिया था और उसके बाद भी किसानों को एमएसपी के माध्यम से अच्छा मूल्य मिल रहा है.
राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार
राज्यसभा से कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सरलीकरण) विधेयक-2020 तथा कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 पारित हुआ. दोनों विधेयकों ध्वनिमत से पारित गया है. दोनों बिल पहले ही लोकसभा से पारित हो चुका है. अब इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा. राष्ट्रपति के दस्तख्त होने के साथ ही कानून बन जाएंगे. जिसके बाद कोई भी किसान कहीं भी अपने फसल उत्पाद को बेच सकता है. साथ ही कंपनियों के साथ करार भी कर सकता है.
14 सितंबर को दोबारा उपसभापति बने
आपको बता दें कि हरिवंश बाबू दोबारा राज्यसभा के उपसभापति बने हैं. इस बार उन्होंने आरजेडी के मनोज झा को हराकर उपसभापति के पद पर काबिज हुए हैं.