
कौन कहता है आसमान में सूराख नहीं हो सकता .. बस तबीयत से पत्थर तो उछालो दोस्तों.. बक्सर के हिमांशु पटेल ने इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है.. किसान का एक बेटा वो कर दिखाया जिसे बड़े-बड़े नहीं कर पाते हैं.
कौन है हिमांशु पटेल
बक्सर के सिमरी प्रखंड के बड़का सिंघनपुर गांव के रहने वाले हिमांशु पटेल ने वो मुकाम हासिल किया है। जिस पर पूरे गांव को ही नहीं, पूरे बिहार को गर्व है । हिमांशु पटेल ने अपनी मेहनत से परिवार के साथ-साथ पूरे बिहार का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है.
किसान के बेटे का कमाल
हिमांशु के पिता राम शंकर पटेल पेशे से एक किसान हैं. हिमांशु की शुरुआती पढ़ाई बक्सर के ही डीएवी स्कूल से हुई. लेकिन हिमांशु को IIT या NIT में एडमिशन नहीं मिला . जिसके बाद उन्होंने बीटेक की पढ़ाई के लिए पंजाब चले गए. हिमांशु ने बीटेक में इतनी मेहनत की कि उन्हें गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया
पहले चांस में GATE
हिमांशु के दिल में IIT में ना पढ़ पाने की कसक थी. जिसे पूरा करने के लिए हिमांशु पटेल ने इतनी मेहनत की कि पहले ही प्रयास में GATE एग्जाम को क्लियर कर लिया। जिसके बाद उन्होंने IIT गुवाहाटी से एमटेक की डिग्री हासिल की.
अमेजन में मिली जॉब
एमटेक करने के बाद हिमांशु पटेल को अमेरिकी कंपनी अमेजन में सॉफ्टवेयर डेवलमेंट इंजीनियर का जॉब मिला. लेकिन यहां उन्होंने इतनी मेहनत की.. जिसके बाद कंपनी ने इन्हें प्रमोट कर दिया
3 करोड़ का पैकेज
अमेजन ने हिमांशु पटेल को अमेरिका के अर्लिंग्टन हेडक्वार्टर के लिए स्पेशल प्रोजेक्ट के लिए चुना गया. खास बात ये है कि उन्हें अमेरिका का L1B वीजा मिला है. इसे हासिल करना दुनिया के सबसे मुश्किल कामों में से एक माना जाता है. अब अमेरिका में उनका सालाना पैकेज लगभग 3 करोड़ रुपये के बीच होगा.
माता-पिता को श्रेय
हिमांशु पटेल अपनी इस शानदार कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता, अपने बड़े पापा कमला शंकर प्रसाद और अपने दोस्तों को दिया है. हिमांशु की इस उपलब्धि की खबर मिलते ही बक्सर के ओल्ड राइस मिल इलाके और उनके पैतृक गांव में जश्न का माहौल है.