
बिहारशरीफ में कोरोना महामारी को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने सैनेटाइजेशन का काम शुरू कर दिया. इसके लिए ड्रोन का सहारा लिया जा रहा है. ताकि हर गली और मोहल्ले में आसानी से सैनेटाइजेशन किया जा सके
सभी 46 वार्डों में होगा सैनेटाइजेशन
सैनेटाइजेशन का काम बिहारशरीफ के सभी 46 वार्डों में होगा. इसके लिए दो ड्रोन से स्प्रे का काम शुरू किया गया है . लेकिन सबसे पहले कोरोना के हॉट स्पॉट में सैनेटाइजेशन का काम किया जा रहा है
तीन मोहल्लों में पहले होगा सैनेटाइजेशन
बिहार शरीफ के तीन मोहल्ले शेखाना, सकुनत औऱ खासगंज कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. ऐसे में वार्ड संख्या 9, 11 और 31 में सैनिटाइजेशन का काम पहले होगा . उसके बाद दूसरे वार्डों में सैनेटाइजेशन किया जाएगा.
सात किलोमीटर तक सैनेटाइजेशन
बताया जा रहा है कि एक ड्रोन से एक दिन में सात से दस किलोमीटर तक सड़क को सैनीटाइज किया जा सकता है। सभी भवनों एवं अस्पतालों को ऊपर-नीचे सभी तरीकों से सैनिटाइज किया जा सकता है। सैनिटाइजिंग का कॉन्ट्रैक्ट डेबेस्ट रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड को मिला है। यही कंपनी मोकामा के टाल क्षेत्र में कीटनाशी का छिड़काव करती है। चंडी के सरथा में भी जलवायु आधारित खेती के रबी सीजन में छिड़काव किया था।
सबसे कम खर्च में सैनेटाइजेशन का काम
बिहारशरीफ नगर निगम के साथ इस कम्पनी ने सबसे कम खर्च में सैनिटाइजिंग का करार किया है। कम्पनी के निदेशक दिवेश कुमार झा एवं कुमार कन्हैया ने बताया कि ड्रोन को नियंत्रित करने के लिए पायलट मयंक शर्मा, अभिषेक कुमार, सौरभ झा एवं विनय शर्मा को बिहारशरीफ में नियुक्त किया गया है। इन दोनों ने बताया कि इससे पहले देश के कई शहरों को सैनिटाइज कर चुका हूं। रिजल्ट बेहतर मिले हैं। ड्रोन स्प्रे का फायदा बताते हुए कहा कि इससे हवा में मौजूद वायरस भी नष्ट हो जाते हैं। दूसरे कि मैन्युअल स्प्रे में स्प्रे मैन को भी संक्रमण होने की संभावना बनी रहती है। ड्रोन स्प्रे में इसका भी डर नहीं होता।
बायो व आर्गेनिक मिश्रण से बनता है सैनिटाइजर
सैनीटाइजर में बायो और ऑर्गेनिक मिश्रण, एलोवेरा मिक्स, सोडियम क्लोराइड, स्पिरिट या अन्य लिक्विड का उपयोग कर सकते हैं। ड्रोन का सर्विलांस व थर्मल कैमरा तापमान आकलन के आधार पर कोरोना संदिग्धों की जांच के लिए चिन्हित कर सकता है।