
सोशल मीडिया हो रही फजीहत और विपक्ष के तीखे सवाल से परेशान होकर आखिरकार नीतीश सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा है. अब मुख्यमंत्री आवास पर अस्थायी हॉस्पिटल नहीं बनेगा.
सरकार ने रद्द किया आदेश
मुख्यमंत्री आवास में अब हॉस्पिटल नहीं बनाया जाएगा. सीएम आवास में जिन डॉक्टरों और नर्सों की तैनाती का आदेश पीएमसीएच अधीक्षक ने दिया था, तत्काल प्रभाव से उस आदेश को रद्द कर दिया गया है.
#UPDATE Bihar: Patna Medical College has withdrawn the order that stated deployment of six doctors, three nurses, and a ventilator at the official residence of Chief Minister Nitish Kumar.
— ANI (@ANI) July 7, 2020
अस्थायी अस्पताल बनना था
कोरोना संक्रमण को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सीएम आवास यानि एक अणे मार्ग पर अस्थायी अस्पताल बनाने का आदेश दिया गया था. जिसमें वेंटिलेटर तक की सुविधा मुहैया कराने की तैयारी थी. साथ ही 24 घंटे डॉक्टरों और नर्सों की तैयारी की गई थी. इसके लिए तीन शिफ्ट बनाए गए थे. जिसमें छह डॉक्टर और तीन नर्सों की तैनाती करने का आदेश दिया गया था. दरअसल, मुख्यमंत्री आवास में कोरोना का वेंटीलेटर युक्त अस्पताल खोलने का फैसला सीएम की भतीजी के कोरोना संक्रमित होने के बाद लिया गया था.
दो दिन पहले आई थी सीएम की रिपोर्ट
आपको बता दें कि बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह के कोरोना पॉजिटिव होने के बाद से ही सियासी महकमे में हड़कंप मचा है. सीएम नीतीश कुमार भी अवधेश नारायण सिंह के संपर्क में आए थे. जिसके बाद उन्होंने अपना कोरोना टेस्ट कराया था. जो की निगेटिव निकला था
पटना: जांच बिलकुल नहीं हो रही है। मुख्यमंत्री की जांच की रिपोर्ट 2 घंटे में आ जाती है। जब खुद पर आपदा आती है तो अपने घर में डॉक्टर भी है, वेंटिलेटर भी और नर्सें भी:राजद नेता तेजस्वी यादव, पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल को CM के आवास पर 6डॉक्टर,3नर्सें और वेंटिलेटर लगाने के आदेश पर pic.twitter.com/TnPYa5XAm8
— ANI_HindiNews (@AHindinews) July 7, 2020
तेजस्वी यादव ने उठाए थे सवाल
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इसे लेकर सवाल उठाया था । तेजस्वी यादव ने कहा था कि आमलोगों इलाज के अभाव में मर रहे हैं और सीएम के घर पर आधुनिक सुविधाओं वाला अस्पताल खोला जाता है. साथ ही सीएम की कोरोना रिपोर्ट दो घंटे में आ जाती है आम लोगों की रिपोर्ट में 5-7 दिन लगता है.