अंचल पदाधिकारी (CO) बर्खास्त.. फर्जीवाड़ा कर पाई थी नौकरी.. जानिए पूरा मामला

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बिहार में एक ऐसे मामले का खुलासा हुआ है. जिसे सुनकर आप चौंक जाएंगे.. बिहार में एक शख्स फर्जीवाड़ा कर सरकारी नौकरी पाता है.. वो भी ऐसा वैसा नहीं.. सीधे अंचल पदाधिकारी यानि सीओ बन जाता है..21 साल तक नौकरी करता है और अचानक पता चलता है कि उसने तो फर्जीवाड़ा कर नौकरी पाया है. तो फिर उसे बिहार सरकार बर्खास्त कर देती है.. सोचिए 21 साल में वो सीओ कितना पैसा कमाया होगा.. सीओ कितना कमाता है वो बिहारवासियों से छिपा हुआ नहीं है.. जिसे लेकर बिहार सरकार भी मान चुकी है..

क्या है मामला
बिहार सरकार ने सुपौल सदर के अंचल अधिकारी (CO) प्रिंस राज को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है. नीतीश कैबिनेट की मुहर के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने उनकी सेवा समाप्ति का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया. राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री और बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा के मुताबिक सीओ प्रिंस राज ने बीपीएससी की 60-62वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से नौकरी पाई थी.

क्या किया फर्जीवाड़ा
दरअसल, प्रिंस कुमार ने दो-दो बार मैट्रिक की परीक्षा दी थी.. उन्होंने उम्र और योग्यता साबित करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया था. उन्होंने 2004 में धर्मेंद्र कुमार के नाम से हाई स्कूल खीरहर, मधुबनी से मैट्रिक की परीक्षा पास की. इसके बाद उन्होंने प्रिंस राज नाम से 2006 में एसटीएसवाई हाईस्कूल मनमोहन, मधुबनी से दोबारा मैट्रिक का सर्टिफिकेट बनवाया.

कैसे हुआ खुलासा
दरअसल, किसी शख्स ने इसकी शिकायत SVU यानि विशेष निगरानी इकाई की थी.. SVU ने इस मामले की गहराई से जांच की, तो पता चला कि एक ही व्यक्ति ने अलग-अलग पहचान के साथ दो बार परीक्षा दी थी. जिसके बाद बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने 1 अगस्त 2025 को उनके 2006 के फर्जी सर्टिफिकेट को रद्द कर दिया था.

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पहले भाई को मरा बताया
विशेष निगरानी ईकाई की जांच में सामने आया कि धर्मेंद्र कुमार के नाम से 2004 में और प्रिंस राज के नाम से 2006 में अलग-अलग जन्मतिथि से माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के प्रमाण-पत्रों का उपयोग किया गया। इसके बाद जब संबंधित विभाग ने प्रिंस राज को शो काउज नोटिस दिया तो उसने अपने जवाब में कहा कि ‘धर्मेंद्र कुमार’ उसका सगा भाई था.. जिसका निधन हो चुका है और दोनों अलग-अलग कानूनी पहचान वाले व्यक्ति हैं।

लेकिन प्रूव नहीं कर पाया
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग .. सीओ प्रिंस राज के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और फिर उसे ये प्रूव करने को कहा गया कि ये साबित करें कि धर्मेंद्र कुमार उनका भाई है और उसकी मृत्यु हो चुकी है..इस मामले में धर्मेंद्र कुमार का डेथ सर्टिफिकेट मांगा गया.. लेकिन निर्धारित अवधि में न तो मृत्यु प्रमाण-पत्र जमा किया और न ही मृत्यु की तिथि, स्थान के बारे में ठोस जानकारी दी गई. जिसे विभाग ने गंभीर माना। इसके साथ ही वे वर्ष 2006 में उत्तीर्ण परीक्षा का आवश्यक कागजात नहीं दे पाए।

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अगर प्रूव कर देते तो
नालंदा लाइव ने जब इस बारे में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सीनियर अफसर से बात की. तो उन्होंने बताया कि यदि वो ‘मृत भाई’ के दावे के समर्थन में वैध मृत्यु प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया जाता, तो जांच की दिशा बदल सकती थी.. उनकी बर्खास्तगी रूक सकती थी. प्रिंस राज मधुबनी जिले के झिक्की गांव के रहने वाले हैं

सरकार की सख्त चेतावनी
डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार या फर्जीवाड़े के दम पर नौकरी पाने वालों के लिए व्यवस्था में कोई जगह नहीं है. उन्होंने कहा- फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी लेने वाले सभी संदिग्ध मामलों की जांच तेज कर दी गई है. जो अधिकारी ईमानदारी से काम करेंगे उन्हें पदोन्नति मिलेगी, लेकिन गलत करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.

मशवरे के बाद बड़ी कार्रवाई
सर्टिफिकेट रद्द होने के बाद राजस्व विभाग ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) से राय मांगी थी. आयोग की हरी झंडी मिलने के बाद विभाग ने कड़ी विभागीय कार्रवाई करते हुए प्रिंस राज को सेवा से मुक्त कर दिया.

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