Home राजनीति थाना में बेहोश होकर गिर पड़े जेडीयू सांसद, होश आया तो धरने पर बैठ गए.. जानिए पूरा मामला

थाना में बेहोश होकर गिर पड़े जेडीयू सांसद, होश आया तो धरने पर बैठ गए.. जानिए पूरा मामला

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अपनी ही सरकार की पुलिस के खिलाफ जेडीयू के एक सांसद ने मोर्चा खोल दिया है. सांसद महोदय धरना पर बैठ गए हैं. धरना पर बैठने से पहले सांसद महोदय थाना पहुंचे. जहां बेहोश होकर वे गिर पड़े.

क्या है पूरा मामला
मामला बिहार के गया जिले (Gaya District) की है. जहां के बाराचट्टी थाना परिसर में जदयू सांसद विजय मांझी (JDU MP Vijay Manjhi)धरने पर बैठ गए. जदयू सांसद विजय मांझी एसएसपी राजीव मिश्रा को बाराचट्टी थाना (Barachatti Police Station) पर बुलाने की मांग कर रहे हैं.

बेहोश होकर गिर पड़े सांसद
दरअसल, सांसद विजय मांझी बाराचट्टी थानाध्यक्ष को लगातार कई कॉल किये थे, पर थानाध्यक्ष द्वारा फोन रिसीव नहीं करने पर वे अपने बाराचट्टी स्थित आवास से थाना के लिए पैदल ही निकल पड़े. थानाध्यक्ष के व्यवहार की वजह से उनका बीपी बढ़ गया और वे थाना पहुंचते हीं बेहोश होकर गिर पड़े. इसके बाद आनन-आपन में थाना परिसर में स्थित सीएचसी के डॉक्टर मौके पर पहुंचकर उनका इलाज किया और दवा देते हुए आराम की सलाह दी.

धरने पर बैठे जेडीयू सांसद
थानाध्यक्ष द्वारा फोन नहीं उठाये जाने को लेकर उनकी नाराजगी इतनी ज्यादा थी कि वे डॉक्टर की सलाह की अनदेखी करते हुए थाना परिसर में ही धरना पर बैठ गए. उन्होंने थाना के साथ ही जिला के पुलिस पदाधिकारी पर भी उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया. सांसद के मुताबिक बाराचट्टी के एक मजदूर की मौत और कई अन्य मजदूरों की समस्याओं को लेकर लेकर हमने बाराचट्टी थानाध्यक्ष को कई बार फोन किया पर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया. इसकी वजह से उन्होंने थाना परिसर में ही धरने पर बैठने का फैसला किया.

जान से मारने की मिली थी धमकी
जेडीयू सांसद विजय मांझी ने कहा कि कुछ दिन पहले उन्हें फोन करके जान से मारने की धमकी दी गयी थी जिसकी शिकायत थाना के साथ ही एसएसपी राजीव मिश्रा और मगध आईजी राकेश राठी से उन्होंने की थी. उस मामले में पुलिस ने आज तक किसी तरह की कार्रवाई नहीं की.

अधिकारियों की वजह से नीतीश सरकार बदनाम
सांसद विजय मांझी ने कहा है कि वे अपने क्षेत्र की जनता की समस्या को लेकर अक्सर अधिकारियों को फोन करते रहते हैं पर बाराचट्टी थानाध्यक्ष उनका फोन नहीं उठाते हैं. यह लोकतांत्रिक व्यवस्था में सांसद को मिले अधिकार का हनन है. यही वजह है कि वे थाना परिसर में ही धरने पर बैठ गए. सांसद की माने तो ऐसे कुछेक अधिकारियों की वजह से नीतीश सरकार की बदनामी हो रही है.

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