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बिहार में बाढ़ की विनाशलीला जारी, पीएम मोदी ने की सीएम नीतीश से बात

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बिहार में बाढ़ की विनाशलीला जारी है. सूबे के 16 जिलों की 73 से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. ऐसे में पीएम मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सीएम नीतीश कुमार से बात की. जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बिहार में बाढ़ से अभी तक के हालात के साथ सरकार की तरफ से चलाए जा रहे राहत और बचाव कार्यों की जानकारी दी।

दरभंगा में हालत खराब
बागमती का जलस्तर बढ़ने से दरभंगा शहर के आधा दर्जन से अधिक मोहल्लों में बाढ़ का पानी घुस गया। शहर के पश्चिमी इलाके बेला, जालान कॉलेज इलाका, नया घराड़ी समेत कई मोहल्लों में पानी एक से दो फीट की तक पहुंचा है। एनएच 57 की ओर से बाढ़ का पानी आने के कारण कई अन्य मोहल्लों में स्थिति गंभीर बनी है। दरभंगा के शहरी क्षेत्र से सटे इलाकों में बाढ़ का पानी कई दिनों से फैला हुआ है अबतक नाव की सुविधा उपलब्ध नहीं कराए जाने से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उधर, सिंहवाड़ा प्रखंड में कमतौल-भरवाड़ा सड़क पर पानी चढ़ने से यातायात बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। हनुमाननगर प्रखंड में बाढ़ का पानी कम होने का नाम नहीं ले रहा है इससे लोगों की परेशानी बनी हुई है।

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मुजफ्फपुर को हल्की राहत
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अफसरों से राज्य में बाढ़ से पैदा हुए संकट का पल-पल हाल ले रहे हैं। मुजफ्फरपुर में बाढ़ का पानी में तेजी से निकल रहा है। औराई-कटरा और बाकी प्रखंडों में बाढ़ से लोगों को राहत मिली है। हालांकि अभी भी सैकड़ों घरों में बाढ़ का पानी जमा हुआ है। इस कारण लोग बड़ी तादाद में सुरक्षित जगहों पर शरण लिए हुए हैं। गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे रहा। जल संसाधन विभाग ने रेवाघाट पर गंडक नदी का जलस्तर 53.71 रिकार्ड किया, जो खतरे के निशान से फिलहाल 0.70 मीटर नीचे है। वहीं बूढ़ी गंडक सिकंदरपुर में खतरे के निशान से ऊपर मापी गई। यहां नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 0.56 मीटर नीचे है।

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पूर्वी चंपारण में खतरा बरकरार
पूर्वी चंपारण के केसरिया प्रखंड में अब भी बाढ़ का खतरा बना हुआ है। शहरी क्षेत्र में भी बाढ़ का पानी बढ़ने से लोगों में दहशत है। वहीं चकिया में गंडक का जलस्तर घटने से लोगों में थोड़ी राहत है। उधर, वाल्मीकिनगर बराज से रविवार को गंडक में 142100 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। अभी गंडक की स्थिति सामान्य रहने से पश्चिम चंपारण में संकट कमा है। लेकिन तराई इलाकों में हुई बारिश से दियारा के लोगों की चिंता एक बार फिर बढ़ चली है।

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