
नालंदा जिला के 80 सरकारी प्राइमरी स्कूल समेत सूबे 1140 प्राइमरी स्कूलों पर खतरा मंडराने लगा है । बताया जा रहा है कि इन स्कूलों को जल्द ही बंद किया जा सकता है ।
क्या है पूरा मामला
नालंदा जिला के 80 सरकारी प्राइमरी स्कूल ऐसे हैं जहां 40 से कम बच्चे पढ़ते हैं। इतना ही नहीं 13 ऐसे स्कूल हैं जहां एक भी बच्चे का एडमिशन नहीं है। ये खुलासा यू-डायस की रिपोर्ट से हुआ है । बिहार शिक्षा परियोजना परिषद ने इस मामले में सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी को नोटिस भेजकर 31 दिसंबर तक जवाब मांगा है।
रिपोर्ट में क्या है
यू-डायस के रिपोर्ट के मुताबिक साल 2017-18 में सूबे में 171 प्राथमिक स्कूल ऐसे हैं जहां अधिकतम शून्य से 20 बच्चे का ही एडमिशन है। इसी तरह 336 स्कूल ऐसे हैं जहां 20 से 30 बच्चों का नामांकन है। जबकि 620 स्कूलों में 31 से 39 बच्चों का ही एडमिशन है। कहा जा रहा है कि अगर यू-डायस की ये रिपोर्ट सही है तो सूबे 1140 स्कूल बंद हो जाएंगे।
क्या है नियम
शिक्षा के अधिकार के तहत नए प्राथमिक स्कूलों की स्थापना वैसे बसाव क्षेत्र में की जाएगी, जहां 6 से 14 आयुवर्ग के बच्चों की संख्या कम से कम 40 हो। साथ ही, उसकी दूरी पास के अन्य प्राथमिक स्कूल से कम से कम 1 किलोमीटर हो।
क्या है यू-डायस जानिए
यू-डायस का मतलब यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफोर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन होता है।यह शिक्षा की एकीकृत जिला सूचना प्रणाली है। शिक्षा क्षेत्र में प्रगति का आकलन करने के लिए प्राथमिक जानकारी देता है। यह नामांकन के साथ ही स्कूलों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं और शिक्षकों और अन्य सुविधाओं की जानकारी देता है।
सूबे में सबसे अधिक पटना के 133 तो बांका के 132 स्कूल बंद होंगे। इसी तरह, रोहतास के 82, नालंदा के 80 स्कूलों के अस्तित्व पर खतरा है।बिहार में 13 ऐसे स्कूल हैं जहां एक भी बच्चा नहीं है। जिसमें अरवल में 4, भोजपुर में 3, गया और पटना में 2-2 जबकि मधुबनी में 1 स्कूल है।