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बिहारशरीफ में प्लास्टिक बैग के इस्तेमाल पर लगेगा बैन

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स्मार्टसिटी बिहारशरीफ में जल्द ही प्लास्टिक बैग पर बैन लगने वाला है. इसके लिए तैयारियां की जा रही है. नगर निगम बिहारशरीफ शहर में जल जमाव के लिए प्लास्टिक बैग को जिम्मेदार बता रहा है. साथ ही प्लास्टिक बैग के इस्तेमाल से लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव भी पड़ता है.

जलभराव है सबसे बड़ी मुश्किल

जरा सी बारिश हुई नहीं की सड़के भर जाती हैं, नाले उफान मारने लगते और बड़े-बड़े गड्ढे मौत का कुंआ में बदल जाते हैं. जलभराव के कारण कई पानी से होने वाली बीमारियां जन्म लेती हैं.  जलभराव का सबसे बड़ा कारण है पॉलीथीन बैग्स.

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पॉलीथीन ब्लॉक कर देते हैं ड्रेनेज सिस्टम

लोग कहीं पर भी पॉलीथीन फेंक देते हैं, जिससे ड्रेनेज सिस्टम ब्लॉक हो जाता है और जलभराव होने लगता है. बारिश के पानी को कहीं से निकलने की जगह नहीं मिलती और पानी प्रदूषित भी होता है. पीडब्ल्यूडी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है प्लास्टिक बैग्स के कारण जगह-जगह जलभराव होता है और इससे डेंगू-चिकनगुनिया फैलाने वाले मच्छर पैदा हो सकते हैं. इसके अलावा सीवर व्यवस्था के बिगड़ने, पानी के जहरीला होने और जमीन के बंजर होने के पीछे भी पॉलीथीन जिम्मेदार है.


अक्टूबर से कचरा प्रबंधन पर होगा काम

बिहारशरीफ के नगर आयुक्त सौरभ जोरवाल के मुताबिक अक्टूबर से कचरा प्रबंधन पर काम में तेजी आएगी। नगर आयुक्त का कहना है कि घरों से लिए जाने वाले कचरे से गीला और सूखा अलग-अलग करने की कार्ययोजना बनाई जाएगी। कचरा उठाने वाले कर्मियों को दो तरह के डब्बे दिए जाएंगे। एक में सूखा और दूसरे में गीला कचरा उठाया जाएगा। प्लास्टिक पर बैन के अलावा गीला और सूखा कचरा प्रबंधन पर काम शुरू होगा।

आपको बता दें कि दुनियाभर में प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए मुहिम चलाई जा रही है. आयरलैंड,फ्रांस,ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश समेत कई देशों में प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगा दिया गया है। नए प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 के तहत, प्लास्टिक थैलियों की मोटाई 40 माइक्रोन्स से बढ़ाकर 50 माइक्रोन्स कर दी गई.

50 माइक्रोन्स से कम वाली पॉलिथीन क्यों होगी बैन

50 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक बैग्स का मार्केट शेयर 25 फीसदी है. ये रीसाइकिल नहीं हो पाते हैं और इन्हें खत्म होने में कई साल लग जाते हैं. इसका ज्यादातर इस्तेमाल सब्जी विक्रेताओं द्वारा किया जाता है. आपको बता दें कि 1000 माइक्रोन एक मिलीमीटर के बराबर होता है. ये हमारे बाल के डायामीटर जितना होता है. इसकी कीमत काफी कम होती है. जिस कारण विक्रताओं द्वारा इसका ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है.

प्लास्टिक के विकल्प

प्लास्टिक थैलियों के विकल्प के रूप में जूट और कपड़े से बनी थैलियों का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए लोगों को भी जागरूक होना होगा. पर्यावरण बचाना हम सब की जिम्मेदारी है. यानि अगर आप अगली बार खरीददारी करने जाएं तो अपने साथ बैग लेकर जरूर जाएं. क्योंकि बिहारशरीफ को सच में स्मार्टसिटी बनाने के लिए पहले हम सब को स्मार्ट बनना होगा।

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