
दरअसल, हरनौत प्रखंड के सबनहुआ माधोपुर के रहने वाले राजाराम यादव करंट लग गया था. जिसके बाद परिजन उन्हें लेकर हरनौत के सरकारी अस्पताल पहुंचे. जहां जांच के बाद डॉक्टर ने राजाराम यादव को मृत घोषित कर दिया। लेकिन इसके बावजूद भी परिजन इलाज कराने पर अड़े रहे. तो डॉक्टर ने कहा कि मृतक का इलाज कैसे हो सकता है? इतना सुनते ही मृतक के परिजन भड़क गए और डॉ गौरव के साथ मारपीट कर दी। बीच-बचाव करने आए मेडिकल कर्मियों को भी पीटा गया।
सूचना मिलते ही सिविल सर्जन पहुंचे
नाराज परिजनों ने डॉक्टर और दूसरे स्टाफ को कमरे में बंद कर दिया. घटना की सूचना मिलते ही नालंदा के सिविल सर्जन डॉक्टर राम कुमार हरनौत पीएचसी पहुंचे और लोगों को समझाबुझाकर शांत कराया.
ओपीडी रहा ठप, दर्ज कराई एफआईआर
डॉक्टर एवं अस्पताल कर्मियों के साथ मारपीट और बंधक बनाए जाने के विरोध में डॉक्टरों ने ओपीडी सेवा बंद कर दी। हालांकि,आपातकालीन सेवा चालू रहा। पीड़ित डॉक्टर ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
72 घंटे का दिया अल्टीमेटम
साथ ही डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने पुलिस-प्रशासन को 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि शुक्रवार से अस्पताल में ओपीडी सेवा शुरू रहेगी। लेकिन, यदि बदमाशों की गिरफ्तारी 72 घंटे के अंदर नहीं हुई तो अस्पताल में ओपीडी के साथ इमरजेंसी सेवा भी ठप कर दी जाएगी। अस्पताल प्रभारी ने कहा कि ऐसे में सेवा नहीं दे सकते।
बिन्द में भी फोड़ा था डॉक्टर का सिर
बुधवार को सड़क दुर्घटना में मारे गए सरमेरा के बढि़या गांव निवासी कन्हैया कुमार के स्वजनों ने भी बिन्द प्रखण्ड पीएचसी में ईंट से मारकर डॉक्टर सचिन का सिर फोड़ दिया था। वहां भी मामला हरनौत से मिलता- जुलता ही था। स्वजनों का कहना था कि यदि दुर्घटनाग्रस्त युवक को ऑक्सीजन लगाया जाता तो जान बचायी जा सकती थी। जबकि डॉक्टर कहना था कि उसकी मौत अस्पताल आने से पहले हो चुकी थी। इस घटना के विरोध में बिद पीएचसी की आउटडोर सेवा गुरुवार को भी ठप रही।