
नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) बिल के खिलाफ धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर बिहारशरीफ में हड़ताल पर रहे। प्राइवेट डॉक्टरों ने अपने-अपने क्लीनिकों को बंद रखा। हालांकि इमरजेंसी सेवा बहाल रही। सरकारी अस्पतालों में आम दिनों की तरह रोगियों का इलाज किया गया। लेकिन निजी क्लीनिकों में ताले लटके रहने के वजह से सैकड़ों रोगियों को बिना इलाज कराए ही वापस लौटना पड़ा।

इलाज होगा काफी मंहगा
आईएमए की अध्यक्ष डॉ. सुनिती सिन्हा का कहा है कि एनएमसी बिल के लागू होने से इलाज बहुत मंहगा हो जाएगा। सरकार कॉरपोरेट सिस्टम से निजी अस्पतालों को चलाना चाहती है। इससे गरीब जनता को इलाज कराने पर अतिरिक्त और अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ेगा।वहीं, डॉ. अरविंद कुमार ने कहा कि धिक्कार दिवस का आयोजन कर इस बिल के खिलाफ में सरकार को संदेश दिया जा रहा है। अगर सरकार नहीं मानी, तो आगे और आंदोलन किया जाएगा। धिक्कार दिवस के दौरान आईएमए परिसर में डॉक्टर नीतीश कुमार, डॉक्टर राजेश प्रसाद, डॉक्टर सुजीत कुमार, पूर्व सचिव डॉ. अभिषेक कुमार, डॉ. इंद्रजीत कुमार, डॉ. अजय, डॉ. नम्रता समेत कई चिकित्सक मौजूद थे।
सैकड़ों रोगी बिना इलाज कराए ही लौटे
बंदी की वजह से दर्जनों क्लीनिकों में इलाज कराने आए सैकड़ों रोगी बिना इलाज कराए ही वापस लौट गए। कई मरीजों ने नालंदा लाइव को बताया कि बंदी की जानकारी उन्हें नहीं थी। बिहारशरीफ आने पर बंदी का पता चला। जिससे उनका समय और पैसा दोनों बेकार में गया । साथ ही इलाज कराए बगैर ही घर लौटना पड़ा ।