Home खास खबरें स्वीटी तुम पर पूरे देश को है नाज.. बिहारी मजदूर की बेटी की सफलता की कहानी

स्वीटी तुम पर पूरे देश को है नाज.. बिहारी मजदूर की बेटी की सफलता की कहानी

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बिहार की बेटियां देश ही नहीं दुनियां में अपना नाम रौशन कर रही है. इसी कड़ी में बिहार की एक और बेटी ने कारनामा किया है . पटना जिले के बाढ़ के छोटे से गांव की रहने वाली स्वीटी कुमारी इंटरनेशनल यंग प्लेयर ऑफ द ईयर बनने वाली देश की पहली महिला रग्बी खिलाड़ी बन गई हैं.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दी बधाई
इंटरनेशनल यंग प्लेयर ऑफ द ईयर-2019 बनी रग्बी प्लेयर स्वीटी कुमारी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बधाई दी. स्वीटी अपने पापा दिलीप चौधरी और रग्बी एसोसिएशन ऑफ बिहार के सचिव पंकज कुमार ज्योति के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने उनके आवास पहुंचीं थीं.

एकलव्य सेंटर खोलने का भरोसा दिया
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रग्बी को बढ़ावा देने भरोसा दिया. साथ ही रग्बी खेल के लिए एकलव्य सेंटर खोलने का आश्वसन दिया. इस मौके पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार भी मौजूद थे

बाढ़ के नवादा गांव की रहने वाली है स्वीटी
19 साल की स्वीटी पटना जिला के बाढ़ प्रखंड के नवादा गांव की रहने वाली है. स्वीटी के पिता मजदूर हैं और मां आंगनबाड़ी में काम करती हैं। गरीबी के बावजूद स्वीटी ने रग्बी खेल कर दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्हें ‘इंटरनेशनल यंग प्लेयर ऑफ द इयर’ का अवॉर्ड दिया है।  ये अवार्ड पाने वाली देश की पहली महिला रग्बी खिलाड़ी हैं।

दौड़ने के चक्कर में बन गई रग्बी खिलाड़ी
पांच पहले तक स्वीटी कुमारी को ये पता नहीं था कि रग्बी कौन सा खेल होता है. वो अपने भाई को देखकर दौड़ना चाहती थी. इसी क्रम में साल 2014 में स्कूल की तरफ से आयोजित गेम्स में हिस्सा लेने के लिए बाढ़ से पटना गई थी। वहां रग्बी के सेक्रेटरी पंकज कुमार ज्योति ने स्वीटी को दौड़ते हुए देखा तो उसे रग्बी खेलने की सलाह दी।

ज्योति की सलाह पर रग्बी को चुना
रग्बी टीम के सचिव पंकज कुमार ज्योति ने जब स्वीटी को रग्बी खेलने की सलाह दी. जिसपर स्वीटी ने कहा कि वो तो रग्बी के बारे में कुछ नहीं जानती है . जिसपर पंकज ज्योति ने कहा कि जब तुम्हें दौड़ना आता है तो तुम रग्बी के लिए परफेक्ट हो, जल्द ही सीख जाओगी।

पंकड कुमार ज्योति ने दिखाई राह
स्वीटी बताती है कि पंकज कुमार ज्योति की सलाह पर वो रग्बी खेलना शुरू कर दी. उस समय उसे सिर्फ इतना ही मालूम हुआ था कि बस बॉल को पीछे पास करना होता है और आगे भागना होता है। रग्बी के रुल्स मुझे नहीं समझ आ रहे थे, मैं सिर्फ कोच पकंज के बताए तरीके से खेल रही थी लेकिन प्रैक्टिस करते-करते ये पता ही नहीं चला कि मैं कब दौड़ते-दौड़ते रग्बी सीख गई। इसके बाद मैंने रग्बी के रुल्स सीखे और जमकर प्रैक्टिस की।

चुनौतियों भरा था सफर
स्वीटी कुमारी बाढ़ के ही एएनएस कॉलेज से ग्रेजुएशन कर रही हैं। स्वीटी दो साल तक बाढ़ से पटना ट्रेन में एक घंटे का सफर तय कर पहुंचती थी फिर रग्बी की कोचिंग करती थी। उस वक्त घऱ के लोग भी नहीं जानते थे कि वो रग्बी खेलने जाती हैं। जब स्वीटी को रग्बी खेलने दुबई जाना था और पासपोर्ट बनवाना था तब उनके मम्मी पापा ने जाना कि रग्बी भी कोई खेल होता है और उनकी बेटी विदेश जाएगी। लेकिन तब बाढ़ क्या बिहार में भी लोग रग्बी के बारे में नहीं जानते थे.

2017 में पहली बार विदेश गई
स्वीटी कुमारी साल 2017 में रग्बी खेलने पहली बार विदेश गई थी. उन्हें दुबई में यूथ ओलिंपिक क्वालिफाई गेम खेलना था। उस वक्त वो काफी डरी हुई थी लेकिन वहां पहला मैच खेलकर लगा जैसे फ्रेंडशिप मैच खेल रहे हों। फिर कोच ने ऐसा हौसला बढ़ाया की वो डर तो खत्म ही हो गया और मैच में फतह भी हासिल कर ली.

जापान में रग्बी का गजब का जुनून
सबसे ज्यादा खुशी मुझे जापान में पिछले साल सितंबर में एशिया रग्बी (मेंस) की ओपनिंग सेरेमनी में जाकर मिली। वहां लोगों के बीच रग्बी के लिए गजब का उत्साह दिखा जिसे देखकर मुझे आश्चर्य हुआ कि इस खेल के लिए इस देश में वैसा ही जुनून है, जैसे भारत में क्रिकेट के लिए होता है। इतनी भीड़ और जापान के लोगों के बीच इस खेल के लिए उत्साह को देखकर बहुत अच्छा लगा था।

सरकारी स्कूल से की थी शुरुआत
स्वीटी ने सरकारी स्कूल से ही एथलेटिक्स के तौर पर शुरुआत की थी और बाद में रग्बी खेलना शुरू किया। उन्होंने अपने स्कूल में 100 मीटर 11.58 सेकंड में पूरा की थी इसके बाद अपनी तेज गति का इस्तेमाल रग्बी खेलने के लिए शुरू किया। स्वीटी के भाई ने भी एथलीट को अपनाया था, लेकिन अधिक मेहनत होने और गरीबी के कारण उसे यह छोड़ना पड़ा।
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