
नालंदा के सांसद कौशलेंद्र कुमार लोकतंत्र की सबसे बड़ी मंदिर यानि लोकसभा में मगध होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का मुद्दा उठाया. उन्होंने सदन को बताया कि कैसे मगध होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज बिहार का सबसे पुराना होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज है. साथ ही उसके इतिहास को भी बताया
सबसे पुराना मेडिकल कॉलेज है
सांसद कौशलेंद्र कुमार ने कहा कि मगध होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय बिहार का सबसे पुराना कॉलेज है जो साल 1969 से चल रहा है. जबकि भारत सरकार ने साल 1973 में संसद में कानून बनाकर होम्योपैथिक सेंट्रल कॉसिल की स्थापना की थी. यानि जब से भारत सरकार ने होम्योपैथिक को मान्यता दी उससे पहले से ये कॉलेज स्थापित है. साथ ही कहा कि मगध होम्योपैथिक मेडिकल बिहार का एकमात्र विधिवत मान्यता प्राप्त कॉलेज है. उन्होंने बताया कि इस मेडिकल कॉलेज की मान्यता बिहार और भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के साथ बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी मुजफ्फरपुर से भी मान्यता प्राप्त है
नामांकन पर लगी रोक हटाने की मांग
सांसद कौशलेंद्र कुमार ने बताया कि इतना पुराना मेडिकल कॉलेज होने के बावजूद साल 2019-20 में यहां होने वाले नामांकन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है . और पिछले तीन साल से कॉलेज को मान्यता नहीं दी जा रही है. जिसके जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने मामले को देखने की बात कही
मगध होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के बारे में जानिए
आपको बता दें कि बिहारशरीफ रेलवे स्टेशन के पास साल 1969 में मगध होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज की स्थापना की गई थी. इसकी स्थापना में मुख्य भूमिका डॉक्टर बीपी जवाहर और शहर के जाने माने चिकित्सक डॉक्टर एलबी शरण ने निभाई थी. डॉक्टर एल बी शरण की गिनती उस वक्त सूबे के बड़े होम्योपैथिक चिकित्सक में होती थी. ऐसे में समझा जा सकता है कि इस कॉलेज में कितने मशहूर लोग जुड़े रहे होंगे. अब भी ये कॉलेज बिहार में होम्योपैथिक में बीएचएमएस की डिग्री देता है . जो मुजफ्फरपुर के भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त है ।