Home खास खबरें बिहारशरीफ की मेयर वीणा कुमारी की बच गई कुर्सी… बड़ी साजिश का खुलासा !

बिहारशरीफ की मेयर वीणा कुमारी की बच गई कुर्सी… बड़ी साजिश का खुलासा !

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बिहारशरीफ की मेयर वीणा कुमारी की कुर्सी बच गई. उनके खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव भारी मतों से गिर गया. अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले पार्षदों ने अपना पाला बदल लिया ।

रातोंरात पार्षद ने बदला पाला
बिहारशरीफ की महापौर वीणा कुमारी के खिलाफ 16 वार्ड पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव लाया था। जिसे लेकर सोमवार को वोटिंग हुई. मतदान में कुल 46 पार्षदों में से 30 पार्षदों ने हिस्सा लिया। यानि 16 पार्षद गायब रहे. 30 में से 28 वार्ड पार्षदों ने वीणा कुमारी के पक्ष में मतदान किया. तो वहीं, सिर्फ दो पार्षदों ने विरोध में वोट डाले. सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले शेष 14 पार्षद या तो अनुपस्थित रहे या उन्होंने पाला बदल लिया। इस तरह मेयर की कुर्सी बरकरार रह गई।

कौन-कौन पार्षद बैठक में शामिल नहीं हुए
फूल कुमारी, संजय कुमार, उषा कुमारी, संतोष कुमार, धनजंय कुमार, सुशील कुमार मीठु, कुसुम सिंह, श्रुति कुमारी, सुनीता कुमारी, लालजीत पासवान, कपिल प्रसाद, खुशबू कुमारी, प्रबिला देवी, नीरज कुमार, रिंकी देवी, पुष्पा देवी।

16 सदस्यों ने लिखित दिया था आवेदन
अविश्वास प्रस्ताव के लिए 16 सदस्यों ने लिखित आवेदन 17 जुलाई को दिया था। आवेदन के आलोक में ही सोमवार को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए विशेष बैठक बुलायी गयी थी। आवेदन पर इन पार्षदों का हस्ताक्षर था- प्रदुम्न कुमार, रंजय कुमार वर्मा, नीलत गुप्ता, दिलीप कुमार, सविता देवी, रमेश कुमार नीरज, नारायण यादव, राजमेहरा, रीना महतो, नेहा शर्मा, अमरनाथ कुमार, वकील खां, अमीर खुसरो, शमा खानम, गजाला परवीन, अशरफ।

पूर्व विधायक ने रची थी साजिश
जब बिहारशरीफ नगर निगम की मेयर वीणा कुमारी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था. तो सब चौंक गए थे. आखिर ये साजिश क्यों रची जा रही है। लेकिन इस अविश्वास प्रस्ताव के पीछे पूरी साजिश थी और ये साजिश शहर के एक बड़े नेता के इशारे पर रची गई थी.

कुर्सी छीनने के लिए नहीं रची थी साजिश
सूत्रों का कहना है कि जेडीयू के पूर्व विधायक इंजीनियर सुनील ने ये पूरी साजिश रची थी. इसका मकसद वीणा देवी की कुर्सी छीनना नहीं था. बल्कि उनकी कुर्सी को अगले 5 साल के लिए सुरक्षित करना था. क्योंकि मतदान के बाद अधिकांश पार्षद इंजीनियर सुनील के आवास पहुंचे और भविष्य की मंत्रणा की। हालांकि पूर्व विधायक ने नगर निगम की राजनीति में अपनी भूमिका से इंकार किया है। कहा, राजनीतिक जीवन में होने के कारण उनके सभी पार्षदों से अच्छे संबंध हैं।

कैसे 5 साल के लिए किया सुरक्षित
दरअसल, बिहार म्यूनिसपल एक्ट 2010-एक्ट के मुताबिक महापौर और उपमहापौर के खिलाफ पहले 2 वर्षों के बाद अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है | चौथे वर्ष में अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता है .ऐसे में महापौर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव गिरने से ये अब उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता है । ऐसे में उनकी कुर्सी सुरक्षित मानी जा रही है .

सवालों के घेरे में वो 14 पार्षद
सवाल बिहारशरीफ के उन 14 वार्ड पार्षदों पर उठ रहे हैं. जिनका हृदय परिवर्तन हो गया। रातोंरात ऐसा क्या हो गया कि जिस मेयर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया था । उसी के पक्ष में खड़े हो गए. यानि तस्वीर पूरी तरह साफ है . खेल बड़ा है और साजिश गहरी है । अब देखना है कि 24 जुलाई को होने वाले डिप्टी मेयर के चुनाव में क्या रणनीति होती है ।

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