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बेगूसराय से चुनाव लड़ने से क्यों डर रहें हैं गिरिराज सिंह.. सबसे सटीक विश्लेषण और 5 बड़ी वजहें

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केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के फायरब्रांड सांसद गिरिराज सिंह (Giriraj Singh) बेगूसराय लोकसभा सीट(Begusarai loksabha seat) से चुनाव नहीं लड़ना चाह रहे हैं. ऐसे में बड़ा सवाल ये उठता है कि गिरिराज सिंह बेगूसराय क्यों नहीं जाना चाहते हैं? क्या वो कन्हैया कुमार का सामना नहीं करना चाहते हैं ? ऐसे में नालंदा लाइव (Nalanda Live)उन वजहों को जानने की कोशिश की।

पहली बड़ी वजह- कन्हैया फैक्टर
बेगूसराय सीट से सीपीआई ने कन्हैया कुमार को उतारा है।अब सवाल ये उठता है कि गिरिराज सिंह को क्या कन्हैया फैक्टर का डर सता रहा है ? इसके लिए दोनों की पृष्ठभूमि को जानना जरूरी है। कन्हैया कुमार और गिरिराज सिंह दोनों भूमिहार जाति से हैं। बेगूसराय सीट पर सबसे बड़ी आबादी भी भूमिहार जाति की है । इसलिए 10 में से 9 बार भूमिहार ही सांसद बने हैं। कन्हैया कुमार ने यहां स्थानीय कार्ड खेला है। कन्हैया कुमार बेगूसराय के ही रहने वाले हैं । जबकि गिरिराज सिंह लखीसराय के रहने वाले हैं। ऐसे में स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा बना है। कन्हैया कुमार को घोर मोदी विरोधी माना जाता है। उनकी पकड़ मुस्लिमों में भी अच्छी है। जबकि गिरिराज सिंह को मोदी का कट्टर समर्थक माना जाता है और मुस्लिम विरोधी हैं।

दूसरी बड़ी वजह- कम्युनिस्टों का गढ़ है बेगूसराय
बेगूसराय को कम्युनिस्टों का गढ़ माना जाता है। इसे पूरब का लेनिनग्राद भी कहा जाता है। लेफ्ट ने कन्हैया कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया है। वाम कैडर की बात करें तो इसमें भूमिहार के साथ ही दलित और अति पिछड़ी जातियों की भी खासी तादाद है. वहीं बीजेपी के मतदाताओं में भी अधिकतर भूमिहार, वैश्य कुर्मी और धानुक वगैरह अति पिछड़ी जातियां हैं.

बेगूसराय के जातिगत आंकड़ों पर भी एक नजर डाल लीजिये…
भूमिहार——-4.75 लाख
मुसलमान—–2.5 लाख
यादव———–1.5 लाख
कुर्मी,कुशवाहा–2 लाख

ऐसे में अगर भूमिहार वोट बंटता है और दूसरे वोट कन्हैया के साथ चले जाते हैं तो गिरिराज सिंह को अपनी नैया फंसती दिख रही है।

तीसरी बड़ी वजह- बीजेपी का अंदरूनी संघर्ष
गिरिराज सिंह के बारे में मशहूर है कि पार्टी में उन्होंने दोस्त कम दुश्मन ज्यादा बनाए हैं। ऐसे में बीजेपी के भीतर एक गुट है जो चाहता है कि गिरिराज सिंह को संसद तक नहीं पहुंचने दिया जाए। उसमें एक नाम बेगूसराय के रहने वाले रजनीश कुमार का है। जो खुद विधान पार्षद हैं और खुद ही टिकट के दावेदार भी थे। माना जा रहा है कि ऐसे कई नेता हैं जो अंदरूनी तौर पर गिरिराज सिंह का विरोध कर रहे हैं । विधान पार्षद रजनीश कुमार और पूर्व एमएलसी विवेक ठाकुर (डॉ सीपी ठाकुर के पुत्र) ने गिरिराज सिंह के तेवर का खुलकर विरोध किया.

चौथी बड़ी वजह- नीतीश कुमार की नापंसद
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से गिरिराज सिंह का तालमेल अच्छा नहीं रहा है. गिरिराज सिंह को नीतीश कुमार विरोधी माना जाता है। जब वो नीतीश मंत्रिमंडल में थे तब भी नीतीश कुमार के खिलाफ खुलकर बोलते थे और नरेंद्र मोदी का समर्थन करते थे। ऐसे में नीतीश कुमार उनका कितना समर्थन करेंगे ये बात गिरिराज सिंह अच्छी तरह समझते हैं

पांचवी बड़ी वजह- बेगूसराय के लिए नया होना
गिरिराज सिंह नवादा से सांसद थे और केंद्रीय मंत्री रहते थोड़ा बहुत काम अगर उन्होंने बिहार में कहीं किया तो नवादा में ही किया। ऐसे में बेगूसराय उनके लिए एकदम नया है। साथ ही वहां की जनता से किस काम के आधार पर वोट मांगेंगे। गिरिराज सिंह को कट्टर हिंदुत्व के समर्थक हैं ऐसे में मुस्लिम वोटर और यादव वोटर उनके खिलाफ गोलबंद हो सकते हैं। कन्हैया कुमार ने गिरिराज पर सवालों के बाण चलाने शुरू कर दिया है। कन्हैया ने गिरिराज सिंह को पाकिस्तानी वीजा मंत्री करार दिया है। क्योंकि वो सब को पाकिस्तान ही भेजते हैं।

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