Home खास खबरें संसद में उठा बख्तियापुर जंक्शन का नाम बदलने की मांग, किसने उठाया मुद्दा.. जानिए

संसद में उठा बख्तियापुर जंक्शन का नाम बदलने की मांग, किसने उठाया मुद्दा.. जानिए

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बख्तियारपुर जंक्शन का नाम बदलने की मांग अब लोकतंत्र के सबसे बड़ी मंदिर यानि संसद में उठी है। बीजेपी सांसद ने राज्यसभा में बख्तियारपुर जंक्शन का नाम बदलने की मांग की.

राज्यसभा में उठा मुद्दा
बीजेपी सांसद गोपाल नारायण सिंह ने राज्यसभा में बख्तियारपुर जंक्शन का नाम बदलने की मांग की. उन्होंने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय को तबाह करने वाले दमनकारी के नाम पर इस रेलवे स्टेशन का नाम होना, एक तरह से दमनकारी का महिमामंडन करने जैसा है।

शून्यकाल में उठा मुद्दा
राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान बीजेपी सांसद गोपाल नारायण सिंह ने मुद्दा उठाते हुए कहा कि बख्तियार खिलजी ने विश्व प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय को नष्ट कर दिया था और 2,000 से अधिक बौद्ध भिक्षुओं को मार डाला था। उसी बख्तियार खिलजी के नाम पर बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन का नाम रखा गया है। उन्होंने कहा कि खिलजी ने नालंदा विश्वविद्यालय को इस हद तक तबाह किया था कि वहां लगी आग दो से तीन साल तक बुझ नहीं पाई थी, वहां की किताबें सुलगती रही थीं। वहां पर छह किमी तक के हिस्से की खुदाई में जली हुई किताबें अब तक मिल रही हैं।

बीजेपी पहले भी उठा चुकी है मांग
दरअसल, बख्तियारपुर जंक्शन का नाम बदलने की मांग मोदी सरकार पार्ट-1 के आखिर में ही उठने लगा था. जब मुगलसराय जंक्शन और पीएम आवास का नाम बदला गया था. उसी दौरान बीजेपी प्रवक्ता अश्विनी उपाध्‍याय ने बिहार के बख्तियारपुर जंक्‍शन का नाम बदलने की मांग की थी। उन्होंने एक ट्वीट में बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्‍यमंत्री सुशील मोदी, रेल मंत्री पीयूष गोयल और केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्‍हा को टैग कर ध्‍यान देने का आग्रह किया था। जिसमें लिखा था कि बख्तियारपुर जंक्‍शन का नाम क्रूर मुस्लिम आक्रमणकारी बख्तियार खिलजी के नाम पर रखा गया है। ये वही व्‍यक्ति है जिसने नालंदा विश्‍वविद्यालय को क्षति पहुंचायी थी। दुर्भाग्‍यवश हम अभी तक इसका नाम बदलने में असफल रहे हैं। मैं नीतीश कुमार, सुशील मोदी, पीयूष गोयल और मनोज सिन्‍हा से इस मामले में संज्ञान लेने की अपील करता हूं।

क्या कहता है इतिहास
चौथी शताब्दी में नालंदा विश्‍वविद्यालय पूरी दुनिया में ज्ञान का केंद्र था। कोरिया, जापान, चीन, तिब्बत और तुर्की से यहां स्टूडेंट्स और टीचर्स पढ़ने-पढ़ाने आते थे। इस विश्वविद्यालय की स्थापना गुप्त शासक कुमारगुप्त प्रथम 450-470 ने की थी। यहां बौद्ध धर्म के साथ ही दूसरे धर्मों की भी शिक्षा दी जाती थी। मशहूर चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी यहां साल भर शिक्षा ली थी। ये विश्व की ऐसी पहली यूनिवर्सिटी थी, जहां रहने के लिए हॉस्टल भी थे।उस वक्त यहां 10 हजार छात्र पढ़ते थे, जिन्हें 2 हजार शिक्षक गाइड करते थे। खिलजी ने 1203 में बिहार पर जीत हासिल कर दिल्ली में अपने राजनीतिक कद को ऊंचा उठाया था। इस विजय अभियान के दौरान खिलजी की सेना ने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय और विक्रमशिला विश्वविद्यालय को नेस्तनाबूत कर हजारों की संख्या में बौद्ध भिक्षुओं की हत्या कर दी।

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