
जम्मू कश्मीर को लेकर कयासों का बाजार गर्म है . कश्मीर में क्या होगा इसे लेकर लोग अलग अलग अटकलें लगा रहे हैं. कोई कह रहा है कि अनुच्छेद 370 हटाया जाएगा तो कोई कह रहा है कि अनुच्छेद 35 ए को खत्म करने का प्लान है . लेकिन इस बीच एक बड़ी बात जो सामने आ रही है कि वो ये है कि जम्मू कश्मीर को तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है . ये बंटवारा धार्मिक और क्षेत्रीय आधार पर तीन भागों में बांटने की तैयारी है ? सूत्रों की मानें तो मुस्लिम बहुल घाटी, हिन्दू बहुल जम्मू और बौद्ध बहुल लद्दाख को तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है . जिसमें जम्मू और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया जा सकता है.
19 साल पहले आडवाणी ने दिया था सुझाव
जम्मू कश्मीर को बांटने का प्लान बहुत पुराना है . 19 साल पहले साल 2000 में भी तत्कालीन गृहमंत्री एलके आडवाणी ने जम्मू कश्मीर को तीन हिस्सों में बांटने का प्लान किया था. लेह के दौरे के दौरान आडवाणी ने लद्दाख और जम्मू को सीधे केन्द्र के नियंत्रण में देने की बात की थी. जब, प्रधानमंत्री वाजपेयी सिन्धु दर्शन मेले में शिरकत के लिए लद्दाख गए थे, तब लद्दाख बौद्धिष्ट एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री से इस क्षेत्र को यूनियन टेरेटरी का दर्जा देने की मांग की थी. आडवाणी ने गृहमंत्री के बतौर उस सुझाव का समर्थन किया था.
संघ ने भी पास किया था प्रस्ताव
जम्मू कश्मीर को धार्मिक आधार पर तीन हिस्सों में बांटने की योजना आरएसएस की है. 18 मार्च 2000 को आरएसएस की जनरल बॉडी मीटिंग में एक प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसमें आरएसएस ने कहा था कि अगर जम्मू और लद्दाख को घाटी से अलग किया गया, तो इन दोनों क्षेत्रों में तेजी से विकास होगा और फिर इन्हें धारा 370 की आवश्यकता भी नहीं रहेगी.
लोकसभा चुनाव से पहले मोदी को दिए थे सुझाव
लोकसभा चुनाव के दौरान भी लद्दाख क्षेत्र को यूनियन टेरेटरी का दर्जा देने की मांग की गई थी .
लद्दाख में ज्वाइंट एक्शन कमिटी का कहना था कि लद्दाख का घाटी के साथ सांस्कृतिक, भाषायी सम्बन्ध नहीं हैं. इसलिए इसे घाटी से अलग किया जाना चाहिए. इतना ही नहीं, 23 सितंबर को नई दिल्ली में 100 प्रमुख हस्तियों पीएम मोदी से अपील की थी कि जम्मू कश्मीर का बंटवारा कर दिया जाए.
जम्मू और लद्दाख के मुस्लिम बहुल जिले
जम्मू इलाके में 10 जिले हैं. जिसमें तीन बड़े जिले डोडा, पूंछ और राजौरी में मुस्लिम बहुल हैं . डोडा में 64 फीसदी, पुंछ में 88.87 फीसदी और राजौरी में 60.97 फीसद मुस्लिम आबादी है. साथ ही ये जिले लाइन ऑफ कंट्रोल के साथ मिलते हैं. इसी तरह लद्दाख के सन 1979 में दो जिले करगिल और लेह बनाए गए. इनमें भी बड़ी मुस्लिम आबादी मौजूद है. ऐसे हालात में लद्दाख और करगिल क्षेत्रों को घाटी से अलग करना कोई आसान बात नहीं है.
लेकिन इतना तो साफ है कि जिस तरीके से अनुच्छेद 35 ए पर मामला सुप्रीम कोर्ट मे चल रहा है. ऐसे में सरकार इस पर इतना जल्दी फैसला नहीं ले सकती है । ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी आडवाणी की योजना को लागू कर अपनी गुरुदक्षिणा दे सकते हैं ।