Home खास खबरें आरक्षण पर बयान देकर बुरे फंसे संघ प्रमुख, मोहन भागवत को कहा- आग से मत खेलो

आरक्षण पर बयान देकर बुरे फंसे संघ प्रमुख, मोहन भागवत को कहा- आग से मत खेलो

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संघ प्रमुख मोहन भागवत ने एक बार फिर आरक्षण का मुद्दा गरमा दिया है । मोहन भागवत ने आरक्षण पर सौहार्दपूर्ण माहौल में चर्चा करने की बात कही है । जिस पर विपक्षी पार्टियों ने कड़ी टिप्पणी की है। कांग्रेस ने जहां बीजेपी का असली एजेंडा बताया. तो वहीं, आरजेडी ने सीधे सीधे चुनौती दे डाली वहीं बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने कहा कि आरक्षण मानवतावादी संवैधानिक व्यवस्था है जिससे छेड़छाड़ अनुचित और अन्याय है। मायावती ने दो टूक कहा कि आरएसएस को अपनी आरक्षण विरोधी मानसिकता त्याग देनी चाहिए।

बीजेपी का असली एजेंडा सामने आया
कांग्रेस ने बीजेपी और संघ पर इसे लेकर हमला बोला. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ-भाजपा का दलित-पिछड़ा विरोधी चेहरा उजागर हुआ। ग़रीबों के आरक्षण को ख़त्म करने का षड्यंत्र और संविधान बदलने की उनकी अगली नीति बेनक़ाब हुई। आगे लिखा कि ग़रीबों के अधिकारों पर हमला, संविधान सम्मत अधिकारों को कुचलना, दलितों-पिछड़ों के अधिकार छीनना… यही असली भाजपाई एजेंडा है।

आरजेडी ने भी दी धमकी
आरजेडी सांसद मनोज झा ने मोहन भागवत के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है । तल्‍ख अंदाज में उन्होंने कहा कि सिर्फ बहुमत के आधार पर सभी कुछ दरकिनार नहीं किया जा सकता है. मनोज झा ने कहा कि आरक्षण की मंजिल अभी काफी दूर है और हासिल करने में अभी समय है. सिर्फ बहुमत के आधार पर सब कुछ नहीं किया जा सकता है. संसदीय बहुमत और नैतिकता में काफी फर्क है. संविधान नैतिकता और बहुमत की नोंक पर है और यदि इसे कोई नुकसान पहुंचा तो मैं आगाह करता हूं ठीक नहीं होगा.

मायावती ने कहा, मानसिकता बदलें
आरएसएस पर निशाना साधते हुए मायावती ने ट्वीट में लिखा, ‘आरएसएस का एससी/एसटी/ओबीसी आरक्षण के सम्बंध में यह कहना कि इसपर खुले दिल से बहस होनी चाहिए, संदेह की घातक स्थिति पैदा करता है, जिसकी कोई जरूरत नहीं है। आरक्षण मानवतावादी संवैधानिक व्यवस्था है जिससे छेड़छाड़ अनुचित व अन्याय है। संघ अपनी आरक्षण-विरोधी मानसिकता त्याग दे तो बेहतर है।’

भागवत ने क्या कहा था
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि ‘आरक्षण का पक्ष लेने वालों को उन लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए बोलना चाहिए जो इसके खिलाफ हैं। इसी तरह से इसका विरोध करने वालों को इसका समर्थन करने वालों के हितों को ध्यान में रखते हुए बोलना चाहिए।’

भागवत बोले- हर बार चर्चा तीखी हो जाती है
उन्होंने कहा कि आरक्षण पर चर्चा हर बार तीखी हो जाती है जबकि इस दृष्टिकोण पर समाज के विभिन्न वर्गों में सामंजस्य जरूरी है। इससे पहले, आरएसएस प्रमुख ने आरक्षण नीति की समीक्षा करने की वकालत की थी, जिस पर कई दलों और जाति समूहों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई थी। अब एक बार फिर इस बयान को लेकर आरएसएस को विपक्ष ने निशाने पर लिया है।

आपको यहां बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत ने आरक्षण को लेकर बयान दिया था. जिसके बाद सियासत गरमा गई थी औऱ हालत ये हुआ था कि मोदी लहर के बावजूद बीजेपी की बुरी हार हुई थी । ऐसे में तीन राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले संघ प्रमुख का ये बयान बीजेपी को कहीं कमजोर कर सकता है ।

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