Home खास खबरें RJD नेता शिवानंद तिवारी ने राजनीति से ले ली छुट्टी, जानिए क्या है अंदर की बात

RJD नेता शिवानंद तिवारी ने राजनीति से ले ली छुट्टी, जानिए क्या है अंदर की बात

0

बिहार की सियासत में ‘बाबा’ नाम से मशहूर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी (Shivanand Tiwary) ने राजनीति छोड़ने के संकेत दिए हैं. उन्होंने फेसबुक पोस्ट के जरिए राजनीति से छुट्टी लेने का एलान किया

शिवानंद तिवारी ने क्या कहा
शिवानंद तिवारी ने सोशल मीडिया पर कहा कि थकान अनुभव कर रहा हूं. शरीर से ज्यादा मन की थकान है. संस्मरण लिखना चाहता था. वह भी नहीं कर पा रहा हूं. इसलिए जो कर रहा हूं, उससे छुट्टी पाना चाहता हूं. उन्होंने आगे लिखा है, ‘ संस्मरण लिखने का प्रयास करूंगा. लिख ही दूंगा, ऐसा भरोसा भी नहीं है. लेकिन प्रयास करूंगा. इसलिए RJD की ओर से जिस भूमिका का निर्वहन अबतक मैं कर रहा था, उससे छुट्टी ले रहा हूं’.

‘बाबा’ का लालू से हुआ मोहभंग
शिवानन्द तिवारी के इस कदम से पार्टी को जोरदार झटका लगा है, क्योंकि उनके इस कदम से सीधे-सीधे तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर सवाल उठा है जो आने वाले समय में पार्टी के भीतर जरूर चुभने वाली चर्चा का विषय होने वाली है. सवाल अब ये भी है कि क्या तेजस्वी वाकई अपने सीनियर नेताओं को तवज्जो नहीं देते? आखिर बाबा ने एक मैसेज करके आज आरजेडी छोड़ने तक के संकेत क्यों दे दिए?

विरोधियों ने की तेजस्वी की घेराबंदी
गौरतलब है कि शिवानन्द तिवारी से पहले रघुवंश प्रसाद सिंह, कांति सिंह, रामचन्द्र पूर्वे और अब्दुल बारी सिद्दीकी जैसे नेता भी दबे जुबानों में अपना दर्द बयां कर चुके हैं. वो और बात है कि बाबा ने इसमें एक कदम आगे बढ़कर अपना दर्द सोशल मीडिया पर रख दिया है.

अंदर की खबर
अंदर की खबर यह कि शिवानंद तिवारी को लंबे समय से पार्टी की प्रमुख गतिविधियों से न सिर्फ दूर रखा जाता था, बल्कि उन्हें पार्टी की बैठकों की जानकारी तक नहीं दी जाती थी. इसके अलावा अभी हो रहे उपचुनाव में उन्हें तेजस्वी ने चुनाव प्रचार करने का मौका तक नहीं दिया, जबकि स्टार प्रचारकों की लिस्ट में बाबा बाकियों से ऊपर की श्रेणी में थे. बावजूद इसके शिवानन्द तिवारी ने खुद से जाकर दरौंदा विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार किया, लेकिन उनके साथ पार्टी का एक कार्यकर्ता तक शामिल नहीं हुआ. जाहिर है इस बात से वह बहुत दुखी थे.

तेजस्वी-लालू ने नहीं ली नोटिस
इस प्रकरण के बाद उन्होंने पार्टी के उम्मीदवार को लेकर भी तेजस्वी और लालू तक अपनी नाराजगी जाहिर की थी, लेकिन पार्टी ने कोई नोटिस तक नहीं लिया. लोकसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद से शिवानन्द तिवारी ने कई बार तेजस्वी को खुली नसीहत दी थी. जब तेजस्वी बिहार की राजनीति से अचानक गायब हो गए थे तो बाबा ने आरजेडी के स्थापना दिवस के मौके पर खुले मंच से तेजस्वी को शेर का बेटा कहकर ललकारा था, जिसके बाद से लालू परिवार उनसे नाराज चल रहा था. बावजूद इसके उन्होंने पार्टी के कार्यकारिणी की बैठक में तेजस्वी और तेजप्रताप के खिलाफ खूब जमकर बोला.

आरजेडी के भीतर जेनेरेशन गैप है?
विरोधियों का मानना है कि यह आरजेडी के भीतर एक आम बात है. सीनियर नेताओं की पार्टी में न सिर्फ अनदेखी होती है, बल्कि सबको लालू परिवार का ‘यस मैन’ बनना पड़ता हैं. अब सवाल यह भी है कि शिवानन्द तिवारी के पार्टी या पद छोड़ने पर आरजेडी को कितना नुकसान होगा. शायद यह कहना अभी मुश्किल है, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि इस कदम से पार्टी को बड़ा झटका लगा है और तेजस्वी के नेतृत्व पर भी यह सवाल उठने लगा है कि क्या वाकई तेजस्वी अपने सीनियर्स की कद्र नहीं करते? क्या वाकई आरजेडी में जेनेरेशन गैप है?

Load More Related Articles
Load More By Nalanda Live
Load More In खास खबरें

Leave a Reply

Check Also

चुनाव प्रचार के दौरान उम्मीदवार को गोलियों से भून डाला.. जानिए पूरा मामला

बिहार विधानसभा चुनाव में खून खराबे का दौर शुरू हो गया है. चुनाव प्रचार के दौरान बदमाशों ने…