Home खास खबरें वाह रे बिहार पुलिस: जिसकी हत्या में 23 लोग गिरफ्तार, 3 महीने बाद वो जिंदा लौटा

वाह रे बिहार पुलिस: जिसकी हत्या में 23 लोग गिरफ्तार, 3 महीने बाद वो जिंदा लौटा

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बिहार पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर सवालिया निशान खड़ा हो गया है । पुलिस ने जिस युवक को मॉब लिंचिंग में मृत माना, वो जिंदा निकला। अब पुलिस के लिए भी ये अबूझ पहेली बन गई है। खास बात ये है कि इस मामले में जिन 23 लोगों की गिरफ्तारी हुई और अब उनका क्‍या होगा

क्या है पूरा मामला
दरअसल पटना जिला के नौबतपुर थाना क्षेत्र के महमतपुर गांव में 10 अगस्त को मॉब लिंचिंग में एक युवक की मौत हो गई थी। मृत व्यक्ति के शव की पहचान रानी तालाब थाना क्षेत्र के निसरपुरा गांव के रहने वाले कृष्णा मांझी के रूप में की गई थी। इसके बाद पुलिस ने शव का पोस्टमॉर्टम कराकर कृष्णा के परिजनों को सौंप दिया था। लेकिन अचानक कृष्णा सकुशल घर लौट आया है। अब मृतक की शिनाख्त करना पुलिस के लिए सिरदर्द बन गया है।

10 अगस्त को क्या हुआ था
बता दें कि 10 अगस्त को नवही पंचायत के महमदपुर गांव में भीड़तंत्र का क्रूर चेहरा देखने को मिला था। जब गांव के रास्ते से गुजर रहे एक राहगीर को बच्चा चोरी के आरोप में उन्मादी भीड़ ने पीट पीट कर मार डाला था। इस मामले में पुलिस ने उसी गांव के 23 लोगों को गिरफ्तार किया था

इनकी हुई है गिरफ्तारी
सबसे खास बात तो यह है कि इस मामले में 23 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। गिरफ्तार लोगों में (1) रामबाबू पासवान (2)विराट कुमार (3) झुनू महतो (4) लाला पासवान (5) धर्मवीर कुमार (6) बिंदा चौधरी (7) मुकेश कुमार (8) सूरजभान कुमार (9) रंजीत कुमार (10) सुधीर महतो (11) ओपित पासवान (12) सोनू कुमार (13) मोनू कुमार (14) शिव पूजन पासवान (15) शत्रुध्न चौधरी (16) नारायण चौधरी (17) पंकज कुमार (18) रामकरण चौधरी (19) विमोचन कुमार (20) संजय कुमार (21) लक्ष्मण साव ग्राम तिसखोरा (22) कुंदन कुमार तथा (23) राहुल कुमार शामिल हैं।

बढ़ गई पुलिस की चुनौती
कृष्णा मांझी के जिंदा घर लौटने के बाद पुलिस महकमा सकते में आ गया है। पुलिस अधिकारी परेशान हैं कि जब कृष्णा जिंदा है तो आखिर वह शख्स कौन था? जिसे लोगों ने पीटकर मौत के घाट उतार दिया? पुलिस का दावा है कि शव की पहचान उसकी पत्नी और पिता ने कपड़ा और हाथ का गोदना देखकर की थी। लेकिन घर लौटे कृष्णा के हाथ पर ऐसा कोई निशान नहीं है। मतलब साफ है कि पुलिस ने अपने बचाव में प्रक्रिया पूरी कर शव को 72 घंटे रखने के दौरान अपने स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की। अब पुलिस के लिए बड़ी चुनौती इतने दिनों बाद मृतक की शिनाख्त करना है।

अभी बंद नहीं हुआ केस
जैसे ही लोग कृष्णा मांझी को जीवित देखा। पूरा मामला सुनकर पुलिस के पांव के नीचे से जमीन खिसक गई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुट गई है कि अगर कृष्णा जिंदा है तो वह शव किसका था, जिसका दाह संस्कार कराया गया। एसएसपी गरिमा मलिक मामले को लेकर गंभीर हैं। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर सिटी एसपी वेस्ट अभिनव कुमार से रिपोर्ट मांगी है। अभिनव ने मामले की जांच शुरू कर दी है। एसएसपी ने कहा, मॉब लिंचिंग मामले का वीडियो और घटनास्थल से शव बरामद हुआ था। आरोपितों की गिरफ्तारी भी हुई थी और कई अज्ञात पर केस दर्ज हुआ था। उन्होंने बताया कि इस केस की चार्जशीट अभी कोर्ट में नहीं दाखिल की गई है। केस अभी बंद नहीं हुआ है। केस ओपेन है और जांच जारी है।

नालंदा लाइव के सवाल
परिजनों के दावे पर पुलिस ने अभियुक्तों से क्यों नहीं कराई कृष्णा की पहचान?
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से मृतक व कृष्णा की शारीरिक बनावट और उम्र में क्या अंतर नहीं मिला?
क्या परिजनों द्वारा दिए गए कृष्णा की गुमशुदगी के आवेदन पर पुलिस ने संज्ञान नहीं लिया?
अगर शिनाख्त हुई तो पुलिस ने क्यों नहीं पता किया कि वह कब और कहां से लौट रहा था?
शव जलाने के साथ सभी साक्ष्य मिट चुके हैं, अब पुलिस मृतक की पहचान कैसे करेगी?
पुलिस का दावा है कि गोदना देखकर पहचान हुई, लेकिन कृष्णा के हाथ पर तो कोई निशान नहीं है?

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