नालंदा के थानाध्यक्ष की मुश्किलें बढ़ी

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नालंदा के थानाध्यक्ष की मुश्किलें बढ़ गई है। कोर्ट ने थानाध्यक्ष पर अवमानना का डंडा चलाया है। नालंदा जिला के सीजेएम उपेंद्र कुमार ने नालंदा थानाध्यक्ष को शोकॉज यानि कारण बताओ नोटिस भेजा है। कोर्ट ने पूछा है कि आखिर कोर्ट के आदेशों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है? साथ ही पूछा गया है कि क्यों नहीं आपके खिलाफ पुलिस अधिनियम कानून के तहत तीन महीने का कारावास या तीन माह के वेतन की कटौती या फिर दोनों से दंडित किया जाए ?
क्या है मामला
नालंदा थाना के बड़गांव के रहने वाले शिव विश्वकर्मा ने 4 जनवरी 2018 को सीजेएम कोर्ट में एक अर्जी दायर की थी। जिसमें उन्होंने घर में घुसकर लूटपाट करने और सामानों को नुकसान करने से संबंधित केस दायर करने की मांग की थी। जिसपर तत्कालीन सीजेएम ने नालंदा थाना को एफआईआर दर्ज करने को कहा था। लेकिन अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। जबकि इसके लिए कोर्ट ने संबंधित थानाध्यक्ष से एसपी के माध्यम से कारण पृच्छा की मांग 14 अप्रैल 2018 को की थी। बावजूद संबंधित थानाध्यक्ष ने न तो उसका जवाब दिया और न ही एफआईआर दर्ज की। जिसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट से दोबारा अपील की। जिसके बाद कोर्ट ने इसे अवमानना का मामला मानते हुए थानाध्यक्ष से 17 जुलाई तक अपना लिखित जवाब देने को कहा है। कोर्ट के रुख से जिले की पुलिस महकमा में हड़कंप मच गया है। कोर्ट ने तय समय पर जबाव नहीं मिलने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।

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