बिहारशरीफ में कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली पर काशी जैसा नज़ारा दिखा

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कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली के मौके पर बिहारशरीफ में भी काशी जैसा नजारा देखने को मिला. बिहारशरीफ के धनेश्वर घाट मंदिर तालाब पर बड़ी संख्या में लोग देव दीपावली मनाने जुटे। लोगों ने गंगा आरती की और घाट सैकडों दीपों की रोशनी से झिलमिला उठा। वाराणसी की तर्ज पर दीप दान और गंगा आरती हुआ। ब्राह्मणों के नेतृत्व में गंगा आरती, मंत्रोच्चारण तथा गंगा पूजा का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। भजन कीर्तन के बीच देव दीपावली मना

मंत्रोच्चार से गूंज उठा 
इस अवसर पर गंगा आरती गान के साथ-साथ भजन, श्लोक पाठ आदि भी हुए। आयोजन में प्रो. रंजन आशुतोष शरण, पूर्व वार्ड पार्षद परमेश्वर महतो,अधिवक्ता रवि रमण,अभिमन्यु,बालेश्वर प्रसाद,रंजीत सिन्हा, मधुप रमण ,संजय कुमार, अख़िलानन्द पांडेय, प्रसून पाठक ,सुनील कुमार, धीरज ,नीरज, डॉ. शशिभूषण सहित स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया। इसलिए यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक हुआ।

शाम होते ही जुटने लगे लोग
जैसे-जैसे सूर्य अस्त होने लगा लोग घाट पर जुटने लगे। हालांकि इस बार कोरोना को लेकर छोटे स्तर पर ही आयोजन किया गया । सूर्यास्त होते ही तालाब का घाट घंटे घड़ियाल और शंख ध्वनि से गूंजने लगा। लोग अपने साथ दीप लेकर आये थे। तालाब की सीढ़ियों पर कतारबद्ध तरीके से दीपों को रखकर जलाया और जल स्रोतों को पवित्र रखने का संदेश दिया।लोगों ने कोरोना महामारी से मानव जीवन के सुरक्षा की भी कामना की।

पंचाने नदी पर आस्था की भीड़
कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर कोसुक स्थित पंचाने नदी सहित जिले के सभी पवित्र नदी और तालाबों में हजारों श्रद्धालुओ ने आस्था की डुबकी लगायी। हालांकि इस बार कोरोना का असर भी दिखा।हर हर गंगे और भगवान विष्णु, महालक्ष्मी और तुलसी के जयकारे के बीच लोगों ने नदी तालाबों में स्नान किया।

लोगों ने दीप दान किया
स्नान के बाद लोगों ने दीप दान भी किये। जलते हुए दीप को नदी तालाबों के पानी में पत्ते, पत्तल की कटोरी या नारियल के छाल पर रखकर प्रवाहित किया। पानी मे तैर रहे दीप का नजारा देखते ही बनता था। इस दिन दान का काफी महत्व रहता है। लोगों ने दान भी किये। काफी लोगों ने उपवास भी रखा।लोगों ने ठंडे पानी में घंटों खड़े रहकर सूर्योदय का इंतजार किया और अर्घ्य दिये। घाट की भी पूजा अर्चना की।

घाट पर तुलसी की पूजा
स्नान ध्यान के बाद श्रद्धालुओं ने नदी तालाब के घाट पर ही तुलसी के पौधे की पूजा की। ब्राह्मणों को अन्न, द्रव्य के साथ तुलसी के पौधे भी दान किये गये। भगवान विष्णु की पूजा अर्चना कर कार्तिक महात्म्य की कथा सुनी। दोपहर तक स्नान- ध्यान और पूजा का क्रम चलता रहा।

खूब हुई सुथनी की बिक्री
सोमवार को सुथनी की बिक्री भी खूब हुई। आम दिनों में कोई सुथनी का नाम तक नहीं लेता लेकिन काफी लोग कार्तिक पूर्णिमा के दिन अनिवार्य रूप से सुथनी खाते हैं। काफी ऊंची कीमत पर सुथनी की बिक्री हुई।

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