
नालंदा इंजीनियरिंग कॉलेज के पांच छात्रों पर बड़ी कार्रवाई हुई है। एक छात्र को एक साल के लिए कॉलेज से निकाल दिया गया है। वहीं, दो छात्र को एक साल के लिए हॉस्टल खाली करने को कहा गया है। जबकि दो छात्राओं को वार्निंग देकर छोड़ दिया गया है। ये कार्रवाई पिछले महीने फ्रेशर पार्टी के दौरान शिक्षकों के साथ बदसलूकी और दुर्व्यवहार किए जाने को लेकर की गई है।
क्या है पूरा मामला
4 मई को नालंदा इंजीनियरिंग कॉलेज चंडी में छात्रों ने फ्रेशर पार्टी का आयोजन किया था। फ्रेशर पार्टी पर नजर रखने के लिए नालंदा इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रोफेसर राजेश बैठा, प्रोफेसर सोनू कुमार, प्रोफेसर राजेश कुमार और प्रोफेसर गरिमा यादव को जिम्मेवारी दी गई थी। पार्टी में कॉलेज के सब छात्र मस्ती कर रहे थे। लेकिन नियत समय से ज्यादा समय तक फ्रेशर पार्टी होने के कारण ये टीचर पार्टी बंद कराने पहुंचे थे। उस दौरान कॉलेज के कंप्यूटर साइंस ब्रांच के आरोपी छात्रों ने प्रोफेसर राजेश बैठा के साथ बदतमीजी की और गाली-गलौज करते हुए और उनका मोबाइल फोन भी छिन लिया था। इतना ही नहीं आरोपी छात्रों ने उन्हें नौकरी से निलंबन कराने की भी बात कही। ऐसा ही बाकी शिक्षकों के साथ भी किया गया। जिसकी शिकायत इन्होंने प्रिंसिपल की। ये सभी छात्र 2016 बैच के चौथे सेमेस्टर हैं।
कमेटी ने जांच के बाद की कार्रवाई
नालंदा इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर सीबी महतो ने ये मामला अनुशासनात्मक कमेटी जांच के लिए सौंप दिया। जिसके बाद अनुशासनात्मक कमेटी ने इन्हें दोषी पाया। इसके बाद कंप्यूटर साइंस के एक छात्र को एक साल के लिए कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया साथ ही 25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। जिबकी इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के दो छात्रों को तुरंत छात्रावास खाली करने का आदेश दिया और उसपर 5 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। इसके अलावा CS और EE ब्रांच की एक-एक छात्रा को सख्त चेतावनी देते हुए छोड़ दिया गया है।
अपील कर सकते हैं छात्र
हालांकि नालंदा इंजीनियरिंग कॉलेज चंडी के प्रिंसिपल का कहना है कि ये सभी छात्र इस आदेश के खिलाफ अपील कर सकते हैं। ये छात्र साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग के निदेशक के पास अपील कर सकते हैं। इसके बाद जो कार्रवाई होगी वो मान्य होगा।