
नालंदा जिले के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों के वैसे हेडमास्टर और टीचरों की अब खैर नहीं है जो बच्चों के पढ़ाने के बदले गायब रहते हैं। अब उनपर बेस्ट नजर रखेगा । ये मोबाइल एप 16 अप्रैल से जिले के शिक्षकों पर नजर रखेगा। इसके लिए जिला शिक्षा विभाग में तैनात अधिकारियों को ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है। जिला शिक्षा विभाग के मुताबिक एप के जरिए जिले के 2197 प्राथमिक और मध्य विद्यालयों की निगरानी होगी। दरअसल, नालंदा जिले में सभी प्राइमरी और मीडिल स्कूलों पर ‘बेस्ट यानि ‘बिहार इजी स्कूल ट्रैकिंग मोबाइल एप से ऑन लाइन मॉनिटरिंग की जाएगी। साथ ही छात्र और शिक्षकों की उपस्थिति भी बढ़ेगी। इस एप के माध्यम से गड़बड़ियों पर रोक लगेगी। डीपीओ एसएसए दिनेश्वर मिश्र के मुताबिक सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाना सरकार की प्राथमिकता है। एप का उद्देश्य स्कूलों में समय पर शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करना है। इससे अधिकारी भी अपने वरीय अधिकारियों या मुख्यालय को गलत रिपोर्टिंग नहीं कर सकेंगे।
पेपरलेस होगा, गड़बड़ी पर लगाम भी लगेगा
डीपीओ ने बताया कि शिक्षा विभाग धीरे-धीरे पेपरलेस हो रहा है। अक्सर स्कूलों के निरीक्षण की रिपोर्ट फाइलों में ही दब कर रह जाती हैं और बाद में रिपोर्ट भी बदल दी जाती है। अब एप के माध्यम से स्कूलों के निरीक्षण की रिपोर्ट ऑनलाइन भरी जाएगी। एप से डाटा फीड करते समय लोकेशन भी दर्ज होगा। यह रिपोर्ट राज्य और जिले के वरीय अधिकारियों की नजर में रहेगी। इसमें स्कूल का मेन गेट, मिड-डे मील और टॉयलेट के फोटो भी अपलोड किए जाएंगे ताकि स्कूलों के बारे में पूरी जानकारी मिल सके।
क्या है ‘बेस्ट एप-:
बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की पहल पर यूनिसेफ के माध्यम से ये मोबाइल एप ‘बेस्ट विकसित किया गया है। इस मोबाइल एप में विद्यालय का नाम, यू-डायस कोड, संकुल संसाधन केंद्र, प्रखंड, जिला, विद्यालय का प्रबंधन, विद्यालय का प्रकार, विद्यालय की कोड, और अन्य डाटा उपलब्ध रहेगा। ये मोबाइल एप जीपीएस युक्त है। मॉनिटरिंग करने वाले अधिकारी विद्यालय परिसर से 200-300 मीटर की दूरी पर इससे जानकारी लोड कर सकेंगे। एप पर कक्षा और स्कूल की तस्वीर भी अपलोड की जा सकती है।