
नालंदा जिला में अब पोस्टऑफिस में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है । पोस्टमास्टर ने जाली सर्टिफिकेट देकर लोगों को लाखों का चूना लगाया है । इसे ऐसे समझिए अगर आपने पोस्टऑफिस में कोई अकाउंट खुलवाया था और आपको पोस्टऑफिस से पासबुक दिया गया था। आप पोस्टऑफिस जाकर अपने अकाउंट में पैसे जमा करते थे और इसकी एंट्री भी पासबुक में हो जाता था । लेकिन वो पासबुक ही फर्जी यानि जाली था । इसका खुलासा तब हुआ जब लोगों के पैसों की अवधि पूरी हुई और पैसे निकलवाने के लिए पोस्टऑफिस पहुंचा। पैसे निकालने के नाम पर कई दिनों तक पोस्टमास्टर टाल मटोल करता रहा। लेकिन जब इसकी शिकायत वरीय अधिकारियों से की गई तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। मामला नालंदा जिला के बिंद पोस्टऑफिस का है।
पूरा मामला जानिए
बिंद पोस्टऑफिस में वहीं के रहने वाले धर्मेंद्र शर्मा और रीना देवी ने पैसे जमा कराए थे । फिक्स डिपॉजिट का समय पूरा होने पर पैसे निकालने डाकघर पहुंचे। तो वहां के पोस्टमास्टर ने टाल मटोल करना शुरू कर दिया और पैसे की कमी बतायी। काफी बाद भी जब पैसे नहीं मिले तो इसकी शिकायत वरीय अधिकारियों से की गई। जिसके बाद पोस्टल विभाग हरकत में आया और जांच में कई तरह की गड़बड़ियां पायी गयीं।
सुकन्या योजना में भी फर्जीवाड़ा सामने आया
पोस्टल विभाग द्वारा की गई जांच में कई खुलासे हुए। जिसमें एक मोदी सरकार द्वारा शुरू किया गया सुकन्या योजना भी है। लोग अपनी बेटी की सुरक्षित भविष्य के लिए सुकन्या योजना में हर महीने पैसे जमा करा रहे थे । लेकिन उनका पैसा सरकारी खजाने में जमा नहीं कराया गया। यानि वो पैसे भी आरोपी डाकपाल रामानुज शर्मा डकार गया। जांच में ये भी पाया गया कि आरोपी डाकपाल रामानुज शर्मा ने कई लोगों को जाली सर्टिफिकेट देकर पैसे डकार गया । बताया जा रहा है कि उसने करीब 5 लाख रुपए का गबन कर चुका है ।
अब तक इन लोगों को लगा चुका है चूना
बेबी कुमारी- 28 हजार
धर्मेंद्र शर्मा- 24 हजार
रीना देवी- 26 हजार
सुकन्या योजना में- रूपा कुमारी, अंजली कुमारी, प्रिया कुमारी।
उपभोक्ताओं में बेचैनी :-
घोटाला के पर्दाफाश होने के बाद उपभोक्ताओं में बेचैनी है। उपभोक्ता अपने पैसे के लिए विभाग का चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन अब तक किसी को पैसे नहीं मिले हैं। वहीं, विभाग जांच कर उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दे रहा है। लेकिन उन्हें लग रहा है कि कहीं उनका पैसा भी तो नहीं डूब गया है ।
नालंदा जिला में ये कोई पहला मामला नहीं है । पोस्टल विभाग के सूत्रों के मुताबिक इस्लामपुर पोस्टऑफिस में भी ऐसे मामले सामने आए हैं । ऐसे में नालंदा लाइव आप से अपील करता है कि एक बार आप भी अपने सर्टिफिकेट ( जैसे किसान विकास पत्र, राष्ट्रीय बचत पत्र) का सत्यापन जरूर करा लें कि वो सही है या फर्जी है। नहीं तो समय आने पर आप भी हाथ मलते रह जाएंगे ।