Home खास खबरें राजकीय सम्मान के साथ होगा रघुवंश बाबू का अंतिम संस्कार.. जानिए परिवार में कौन

राजकीय सम्मान के साथ होगा रघुवंश बाबू का अंतिम संस्कार.. जानिए परिवार में कौन

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पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह (Raghuvansh Prasad Singh) का पार्थिव शरीर दिल्ली से इंडिगो की फ्लाइट से पटना एयरपोर्ट लाया गया है. इस दौरान बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार(Nitish Kumar) ,उपमुख्‍यमंत्री सुशील कुमार मोदी और बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी (Rabri Devi) समेत कई नेताओं ने श्रद्धांजलि दी.

सोमवार होगा अंतिम संस्‍कार
पटना एयरपोर्ट के बाद रघुवंश बाबू का पार्थिव शरीर बिहार विधानसभा परिसर में अंतिम दर्शन लाया गया और फिर बाद में पटना स्थित उनके आवास 143 MLA कॉलोनी कौटिल्य नगर ले जाया गया. कौटिल्य नगर में ही रात भर उनके शव को रखा गया गया है. सुबह रघुवंश प्रसाद सिंह की शव यात्रा को वैशाली गढ़, माहनर, पन्नापुर और शाहपुर में घुमाया जाएगा. उसके बाद दोपहर बाद उनके पैतृक गांव मजलिसपुर में अंतिम संस्कार किया गया.

इसे भी पढ़िए-पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश बाबू का राजनीतिक सफर के बारे में जानिए

दिल्ली एम्स में हुआ था निधन
पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह का दिल्ली एम्स में निधन हो गया. उन्हें सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी. रघुवंश प्रसाद सिंह का 4 अगस्त से ही दिल्ली एम्स में इलाज चल रहा था और वो पिछले चार दिनों से वेंटिलेटर पर थे.

रघुवंश प्रसाद सिंह का परिवार
रघुवंश प्रसाद सिंह अपने दो भाइयों में बड़े थे. उनके छोटे भाई रघुराज सिंह का पहले ही देहांत हो गया है. रघुवंश प्रसाद सिंह की धर्मपत्नी जानकी देवी भी अब इस दुनिया में नहीं हैं. रघुवंश बाबू को दो बेटे और एक बेटी है. रघुवंश प्रसाद सिंह के परिवार से उनके अलावे कोई दूसरा सदस्य राजनीति में सक्रिय नहीं है. रघुवंश प्रसाद के दोनों बेटे इंजीनियरिंग की पढ़ाई करके नौकरी कर रहे हैं. बड़े बेटे सत्यप्रकाश दिल्ली में इंजीनियर हैं और वहीं नौकरी करते हैं जबकि उनका छोटा बेटा शशि शेखर भी पेशे से इंजीनियर है जो हांगकांग में नौकरी करते हैं. इसके अलावे जो एक बेटी है वो पत्रकार है और टीवी चैनल में काम करती हैं.

नहीं चाहते कि परिवार से कोई राजनीति में आए
रघुवंश प्रसाद सिंह से जब एक इंटरव्यू पूछा गया था कि आखिर उनके अलावे परिवार के किसी दूसरे सदस्य ने राजनीति में कदम क्यों नहीं रखा तो रघुवंश बाबू बड़ी बेबाकी से कहते हैं कि आज जिस हालत में हम अभी पड़े हैं, अपने बच्चों को भी उसी में धकेल देते ये हरगिज सही नहीं होता. ये भी कोई भला जिंदगी है पूरे जीवन भर त्याग, त्याग और सिर्फ त्याग.

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