
नालंदा जिले के बुनकरों के लिए अच्छी खबर है। जल्द ही उनकी दिन फिरने वाले हैं। अब उन्हें पैसों के लिए मोहताज नहीं रहना पड़ेगा।
रेलवे बुनकरों के अच्छे दिन लाने का प्रयास कर रही है। मध्य रेलवे ने नालंदा जिला के बुनकरों की आर्थिक समस्या को दूर करने के लिए बुनकरों के बने तौलिया, तकिया का कवर और सतरंगी बेडशीट की खरीदने का फैसला लिया है। इसके लिए मध्य रेलवे ने 30 जुलाई तक हस्तकरघा से निर्मित उत्पाद का सैंपल मांगा गया है। बिहार रिजनल हैंडलूम के चेयरमैन नकीब अंसारी के मुताबिक रेलवे द्वारा हर साल करीब 18 करोड़ के हस्तकरघा से निर्मित उत्पाद की खरीददारी करेगी।
नालंदा बनेगा सतरंगी चादरों का बाजार
नालंदा जिला में छह हजार बुनकर हैं इसकी संख्या बढ़ाकर 10 हजार किया जाएगा। नालंदा जिला में आठ जगहों रामचन्द्रपुर, बसवन विगहा, रहुई, सोहडीह, परबलपुर, अलीनगर, झींगनगर और नेपुरा में सतरंगी चादरें बनाई जा रही हैं।
अटल पेंशन योजना के तहत मिलेगी पेंशन
60 साल से अधिक के वृद्ध लोगों को सरकार की ओर से अटल पेंशन योजना में जोड़ा जाएगा। जबकि सभी बुनकरों को महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना का लाभ दिया जाएगा। इसके लिए लगने वाले एक हजार प्रीमियम की राशि में से 800 केन्द्र तो 200 रुपया राज्य सरकार देगी। इसमें डेढ़ लाख तक रुपया मिलेगा।
सात प्रतिशत पर मिलेगा कर्ज
केन्द्र द्वारा चलायी जा रही मुद्रा योजना के तहत सभी लोगों को 16 प्रतिशत पर कर्ज दिया जाता है। लेकिन इन कमिर्यों को काम के लिए कर्ज लेने पर मात्र सात प्रतिशत ही सूद देनी होगी। बाकी सूद राज्य सरकार देगी।