अंग्रेजी सिखाने के नाम करोड़ों का घोटाला, 4 IAS समेत 10 लोगों पर FIR दर्ज

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बिहार में गरीब बच्चों को अंग्रेजी सिखाने के नाम पर करोड़ों का घोटाला हुआ है. खास बात ये है कि इस घोटाले में चार बड़े IAS अफसरों के नाम सामने आए हैं. जिन्होंने गरीब बच्चों को अंग्रेजी तो नहीं सिखायी. बल्कि खुद ट्रेनिंग के नाम पर करोड़ों रुपए डकार गए . अब इस मामले में 4 IAS समेत 10 लोगों के खिलाफ सतर्कता जांच ब्यूरो (VIB) ने मुकदमा दर्ज किया है. मामला महादलित विकास मिशन से जुड़ा

क्या है पूरा मामला
ये पूरा मामला महादलित विकास मिशन से जुड़ा है. जिसके तहत 4 अक्टूबर 2011 को एक विज्ञापन प्रकाशित हुआ. जिसमें महादलित युवाओं को 22 ट्रेड की ट्रेनिंग के साथ स्पोकेन इंग्लिश सिखाना था. जिसमें दशरथ मांझी कौशल विकास योजना के तहत कौशल विकास ट्रेनिंग के लिए आवंटित धन किया गया था।

कागज पर हो गई ट्रेनिंग
महादलित विकास मिशन के तहत स्पोकेन इंग्लिश का कोर्स कराने का जिम्मा ब्रिटिश लिंगुआ को दिया गया था.पूरा कोर्स को सिर्फ कागज पर ही पूरा करा दिया गया. एक ही छात्र के दो-दो नाम, एक ही छात्र के दो रोल नंबर दिया गया. जांच में पाया गया कि इस दौरान ब्रिटिश लिंगुआ के निदेशक डॉ. बीरबल झा ने मिशन के अधिकारियों के साथ फर्जी कागज तैयार कर साल 2012 से लेकर 2016 तक करीब 17 करोड़ रुपए ले लिए.

किस किस पर दर्ज हुआ मुकदमा
विजिलेंस ने घोटाले के आरोप में IAS अफसर एसएम राजू ( अभी निलंबित हैं) के अलावा 3 रिटायर आईएएस अफसर राघवेंद्र झा, राज नारायण लाल और रामाशीष पासवान पर केस दर्ज किया है. इसके अलावा तत्कालीन राज्य परियोजना पदाधिकारी देव जानीकर,ओएसडी अनिल कुमार सिन्हा, मिशन को-ऑर्डिनेटर शशि भूषण सिंह, ओएसडी हरेंद्र श्रीवास्तव, सहायक मिशन निदेशक वीरेंद्र चौधरी और ब्रिटिश लिंगुआ के निदेशक डॉ. बीरबल झा पर केस दर्ज किया गया है.

पहले से दागदार है राजू का दामन
IAS अफसर एसएम राजू को जनवरी 2017 में सस्पेंड किया गया था. लेकिन वे साल 2003 से ही विवादों में रहे हैं. बिहार में तत्कालीन विपक्ष के नेता सुशील कुमार मोदी ने भ्रष्टाचार के आरोपों पर उनकी बर्खास्तगी की मांग करते हुए सरकार को सलाह दी थी कि वो कर्नाटक में अपने निलंबन के बाद जहां भी वह प्रतिनियुक्ति पर गए थे, उसे स्वीकार नहीं किया जाए। दिसंबर 2016 में विजिलेंस ब्यूरो ने आईएएस अधिकारी राजू समेत 15 अन्य अधिकारियों के खिलाफ बिहार के बाहर तकनीकी शिक्षा लेने वाले एससी/एसटी छात्रों के लिए मैट्रिक छात्रवृत्ति वितरण में कथित अनियमितता के लिए केस दर्ज किया था। अप्रैल 2019 में सतर्कता जांच ब्यूरो ने 5.55 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि के गबन के लिए आईएएस अधिकारी एसएम राजू और दो सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों और पांच अन्य के खिलाफ घोटाले में कथित संलिप्तता के लिए आरोप पत्र दाखिल किया था।

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