
ये तस्वीर स्मार्ट सिटी बनने जा रहे बिहारशरीफ के एक कॉलेज की है। जहां अब पढ़ने के लिए बच्चे नहीं आते हैं बल्कि वहां गाय और भैंसे जुगाली करने आती है। क्लास रूम के गेट पर भैंसे बांधी जाती है। जहां जूलॉजी का लैब है यानि प्रयोगशाला। जिसमें बच्चों को कोशिका से लेकर मानव संरचना जैसी चीजें सिखाई जाती थी। वहां अब भैसों ने डेरा जमा रखा है। ये हाल बिहारशरीफ में डीएम दफ्तर से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर बने एक महिला इंटर कॉलेज का है। जिसके संचालक अस्थावां के विधायक डॉक्टर जितेंद्र कुमार हैं।
ये हाल अयोध्या प्रसाद दशरथ इंटर महिला महाविद्यालय का है। पूरा कॉलेज परिसर गोशाला में तब्दील हो गया है। नालंदा जिले में लड़कियों को इंटरमीडिए की शिक्षा देने के लिए इस कॉलेज की स्थापना 1991 में की गई थी। इसके देखरेख की जिम्मेदारी अस्थावां के मौजूदा विधायक डॉक्टर जितेंद्र कुमार के पिता अयोध्या प्रसाद की थी। शुरुआती दिनों में इस कॉलेज की गिनती शहर के अच्छे कॉलेज में होती थी। क्योंकि बिहारशरीफ में इसके अलावा सिर्फ एक ही महिला कॉलेज था। नालंदा महिला कॉलेज । जहां सभी लड़कियों का एडमिशन नहीं होता था। ऐसे में उन छात्राओं का जिनका मैट्रिक में कम नंबर आते थे । उनका एडमिशन होता था। शुरुआती दिनों में इस कॉलजे में पढ़ाई का स्तर भी ठीक ठाक था। लेकिन धीरे धीरे ये तबेला में तब्दील हो गया। जबकि इसके संचालन की जिम्मेदारी अस्थावां के जेडीयू विधायक डॉक्टर जितेंद्र कुमार की थी। अब सवाल उठता है कि आखिरी इसकी बदहाली के लिए जिम्मेदार कौन है ? इसके लिए जितना जिम्मेदार सिस्टम है उससे कहीं ज्यादा इसके संचालक ?