डायरिया से हड़कंप, अस्पताल ने खड़े किए हाथ, डीएम ने लगाई क्लास

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नालंदा के एक गांव में डायरिया के प्रकोप से हड़कंप मचा है. करीब 50 लोग अस्पताल में भर्ती हैं. मामला चंडी थाना के बढ़ौना गांव की है. जहां 50 लोगों को डायरिया ने अपनी चपेट में ले लिया है. जिसमें ज्यादा महिलाएं और बच्चे हैं.मरीजों को अानन-फानन में चंडी रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया गया. लेकिन डॉक्टरों ने इलाज करने से मना कर दिया. उनका कहना है कि अस्पताल में डायरिया के इलाज की व्यवस्था नहीं है


अस्पताल ने खड़े किए हाथ
बढ़ौना गांव से महज एक किलोमीटर की दूरी पर चंडी रेफरल अस्पताल है. हालात ये है कि जब लोग बीमार होने लगे तो परिजन चंडी के सरकारी अस्पताल ले गए.लेकिन वहां डॉक्टरों ने ये कहकर मरीजों को लौटा दिया कि यहां इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं है. जिसके बाद मरीजों को प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती कराना पड़ा.

डीएम साहब ने लगाई फटकार
नालंदा लाइव समेत नालंदा जिला के तमाम मीडिया कर्मियों ने जब इसकी सूचना डीएम डॉक्टर त्यागराजन को दी। तो वे फौरन एक्शन में आ गए. उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की जमकर क्लास लगाई और सिविल सर्जन को तुरंत मेडिकल टीम भेजने का आदेश दिया. साथ ही पूरे गांव में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करने का आदेश दिया

मेडिकल टीम पहुंचा बढ़ौना
नालंदा के जिलाधिकारी डॉक्टर त्यागराजन की डांट के बाद स्वास्थ्य विभाग की नींद खुली. स्वास्थ्य विभाग ने आनन फानन में मेडिकल टीम को बढ़ौना भेजा. जहां मरीजों का इलाज किया जा रहा है. सीएस भी बढौना पहुंचकर लोगों का हाल-चाल जाना

सरकारी बोरिंग का पानी से हुए बीमार
गांव वालों का कहना है कि गंदा पानी पीने से लोग बीमार हुए हैं. गांव में पीएचईडी विभाग ने बोरिंग कराई है। उसी बोरिंग का पानी पूरे गांव में सप्लाई होती है। लोगों का आरोप है कि बोरिंग से गंदा पानी निकलता है। गंदा पानी पीने से गांव के लोग डायरिया के शिकार हो रहे हैं। हालांकि गांव वालों की शिकायत के बाद बोरिंग को बंद कर दिया गया है।

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नालंदा लाइव के सवाल
नालंदा लाइव का सवाल स्वास्थ्य विभाग से है। सवाल ये है कि चंडी रेफरल अस्पताल ने मरीजों का इलाज करने से इनकार क्यों कर दिया ? क्या सरकारी डॉक्टर चाहते हैं कि मरीजों का इलाज निजी क्लिनिक में कराया जाय ? क्या नालंदा के अस्पतालों का वाकई इतनी बुरी स्थिति है कि वहां इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं है? सवाल ये भी है कि क्या नालंदा जिला प्रशासन और सिविल सर्जन उस डॉक्टर पर कार्रवाई करेगा जिसने मरीजों को इलाज करने से मना कर दिया था ? सवाल ये भी है कि जब सूबे के मुखिया के घर में अस्पतालों का ये हाल है तो बाकी जगहों की कल्पना तो आप सब कर सकते हैं

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