Home बिहार शरीफ जानिए सुप्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक डॉ अजय के बारे में, गरीब और असहाय के लिए देवतातुल्य ……

जानिए सुप्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक डॉ अजय के बारे में, गरीब और असहाय के लिए देवतातुल्य ……

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नालन्दा जिला के जाने माने नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ अजय कुमार जो की बचपन से ही गरीबो और लाचारों की सेवा करते आ रहे है। यही कारण है कि समाज सेवा के तहत रोटरी क्लब में बतौर अध्यक्ष पद सभालते हुए कई सामाजिक कार्य किए ।

आइए जानते है उनके जीवनी के बारे में

हमेशा चेहरे पर मुस्कान रखने वाले डॉ अजय का जन्म 22 नवम्वर 1975 को चण्डी प्रखंड के छोटे से गांव विरनावां में हुआ था । इनके पिता केशव प्रसाद और माता मीना प्रसाद है। वे तीन भाईयों मे सबसे बड़े है। इस कारण परिवार के लोगों का स्नेह के उन पर बना रहा, किशोरावस्था में गांव के पगडंडियों पर चलकर अपने चाचा के साथ गांव के तालाव में मछली पकडने जाया करते थे । डॉ अजय को खेल कूद ,मछली पकडने एवं समाज सेवा करने का शौक बचपन से ही रहा ।

बंगाल से शुरु किया अपना शिक्षा

वे तीन वर्ष के आयु में अपने पिता के साथ बंगाल के मैथन चले गए प्रारंभिक शिक्षा उनकी मैथन में ही हुई । 1992 में हाई स्कूल पास करने के बाद 1994 में आईएससी किया 1994 में वे मेडिकल के क्षेत्र में पी एम सी एच में प्रवेश पाया। 6 साल एमबीबीएस की पढ़ाई करने के बाद 1 वर्ष तक ईएनटी स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। बेहतर मौके के तलाश में उन्होंने नेत्र चिकित्सा में पुनः स्नातकोत्तर में प्रवेश लिया और 3 वर्षों की कठिन परिश्रम के बाद आई स्पेशलिस्ट की डिग्री प्राप्त कि।

सरकारी अस्पताल में भी दे चुके है सेवा

डॉ अजय 6 माह तक सरकारी अस्पताल में भी सेवा देने का काम किया लेकिन वहां उनको सरकारी कार्यों में मन की संतुष्टि नहीं मिल रही थी। डॉ अजय 1998 में दूसरी पारी की शुरुआत करते हुए विरेन्द्र प्रसाद के पुत्री अर्चना कुमारी के साथ परिणय सुत्र में बंध गए औऱ 8 अगस्त 2007 को इनके घर में पुत्री का जन्म हुआ जिसका नाम जहान्वी रखा गया।

जहान्वी आई केयर क्लीनिक के माध्यम से दे रहे सेवा

जिसके बाद समाज सेवा के उद्देश्य से रांची रोड स्थित पैला पोखर में अपने पुत्री के नाम पर जहान्वी आई केयर के नाम से क्लीनिक खोल मानव सेवा में लग गए | बचपन से मेधावी छात्र रहने के कारण वे अपने जीवन में कभी फेल नही हुए तथा लोगों के नाकारात्मक सोच को किनारा करते हुए आगे बढने का काम किया।

रोटरी क्लब में भी रहे सक्रिय

वे अपने परिवारिक दायित्व को पूरा करते हुए आईएमए एवं रोटरी क्लब के सदस्य बने रोटरी क्लब में सक्रिय रूप से सहभागिता को देख क्लब ने 2016 – 17 के लिए रोटरी क्लब का सचिव, एवं सत्र 2018-19 को अध्यक्ष बनाया इन्होंने अपने कार्यकाल में पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर मिशन 1लाख पौधा लगाने के लक्ष्य को विद्यालय के छोटे-छोटे बच्चों के सहयोग से पूरा करते हुए हैप्पी स्कूल,सहेली सेन्टर , पेयजल आदि समाज कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर लाने का काम किया।

विदेश जा कर भी कर चुके है सेवा धर्म

डॉ अजय ने 15 से 27 जुन तक माऩव सेवा का धर्म निभाते हुए युगांडा के कंपाल में सैकडो मरीजों का आख का सफल अाप्रेशन कर भारत लौटे । इस सेवा के लिए उनको यूगांडा सरकार ने सम्मानित किया। रोटरी जिलाध्यक्ष ने उन्हें उत्तक्रिस्ट अध्यक्ष के सम्मान से नवाजा । उनके समाजीक कार्यों मे उनकी धर्म पत्नी अर्चना ने भी कदम से कदम मिलाकर उनका हौसला बढाने का काम किया डॉ अजय 7 लाख 50 हजार (10 हजार डालर ) रोटरी को अपने अध्यक्षीय काल में दान देकर मेजर डोनर की उपाधि पाने बाले जिले के पहले व्यक्ति रहे |वही डॉ अजय के दूसरे भाई बेंगलुरु में पशु चिकित्सक हैं साथ ही वे एनजीओ चलाने का कार्य करते हैं तथा छोटे भाई मुजफ्फरपुर रिसर्च सेंटर में लीची में वैज्ञानिक पद पर आसीन है।

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