
भरावपर मोहल्ला स्थित करीब 100 साल पुराना श्री बिहार धर्मशाला ध्वस्त होने के कगार पर है। यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। हाल ही में दीवार का एक हिस्सा टूट कर गिर गया था।
अतिक्रमण की चपेट में धर्मशाला की जमीन:
धर्मशाला के नाम से करीब 57 डिसमील जमीन है। इनमें से 10 डिसमील जमीन पर अवैध कब्जा है। इसका मुकदमा भी चल रहा है। 47 डिसमील जमीन के करीब आधे हिस्से में भवन बना है बाकि परती है। सचिव का आरोप है कि धर्मशाला के पांच कमरों पर कब्जा कर व्यवसायी गोदाम के रूप में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। 15 के करीब दुकानें हैं। नाममात्र का किराया। वह भी पिछले कई महीनों से बकाया है। कई बार नोटिस भी की गयी है। पर कोई फायदा नहीं हुआ। ग्रांउड फ्लोर पर 14 कमरे हैं। इनमें से 11 में परमानेंट किरायेदार हैं। ये बर्षों से इसपर कब्जा जमाये बैठे हैं।
150 से 250 रुपये है कमरों का किराया:
महंगाई के इस जमाने में धर्मशाला में रह रहे लोगों को मात्र 150 से 250 रुपया किराया लगता है। वह भी बिजली के साथ। वहीं शहर के मेन बाजार में दुकानों का किराया मात्र 1000। सचिव की माने तो जब से उन्होंने पदभार संभाला है, किराया नहीं मिला है। दुकानदारों ने इस संबंध में मुकदमा किया है। वहीं कमरों में रह रहे लोग भी इसे छोड़ने को तैयार नहीं है। कहतें हैं कोई इन्हें यहां से नहीं हटा सकता। सचिव का आरोप है कि यह सब पूर्व सचिव की शह पर हो रहा है। विभागीय आदेश को धता बताकर किराया भी वसूल रहे हैं। प्रशासन चाहे तो इसे रोक सकता है। लेकिन पिछले नौ महीने से एक मिटिंग तक नहीं हो पायी है।
अब भी रुकते हैं यात्री:
खस्ताहाल होने के बाद दूसरे जिलों से आये लोग यहां ठहरते हैं। वर्तमान कमेटी ने शौचालय, बिजली व पानी का इंतजाम किया है। हालांकि भवन काफी जर्जर है। यहां रहने वाले किरायेदार पूछने पर कहते हैं वे कब से रह रहे हैं, उन्हें नहीं पता। धर्मशाला यात्रियों के ठहरने के लिए है। ना कि वर्षों तक रहने के लिए। वर्तमान कमेटी इन सब का जिम्मेदार पुरानी कमेटी को बताती है।
एसडीओ पर अनदेखी का आरोप
श्री बिहार धर्मशाला के पदेन अध्यक्ष एसडीओ होते है धर्मशाला के सचिव ने एसडीओ पर भी अनदेखी का आरोप लगाया है ।बहरहाल अब देखना यह होगा की प्रशासन कब तक धर्मशाला को अतिक्रमण मुक्त कर पाती है ।