
कोरोना वायरस और लॉकडाउन को लेकर पीएम मोदी ने राज्य के मुख्यमंत्रियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चर्चा की. इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोटा मामले को लेकर प्रधानमंत्री मोदी को खरी खरी सुनाई.
सीएम नीतीश की दो टूक
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास जब कुछ बोलने का मौक़ा आया तो उन्होंने आपदा प्रबंधन कानून के प्रावधान ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पढ़कर सुनाना शुरू कर दिया. शुरू में तो कुछ लोग समझ नहीं पाए लेकिन नीतीश कुमार कोटा से छात्रों को या अन्य जगहों से मजदूरों को लाने के मामले में साफ-साफ नाराजगी जाहिर कर दी. नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि आप देख लीजिए एक्ट में एक राज्य से दूसरे राज्य में व्यक्ति और न ही वाहन जाने का प्रावधान है इसलिए हम इसका पूरा पालन कर रहे हैं.
पहले एक तरह की नीति बनाए केंद्र
सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि अगर केंद्र चाहे तो एक समान नीति बना दे और उन्हें अपने लोगों को वापस लाने में कोई दिक्कत नहीं हैं. लेकिन नीतीश ने कहा कि उनके पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वो बस भेजे साथ केंद्र से सभी लोगों की मेडिकल जांच कराने का भी आग्रह किया. नीतीश के रुख़ से साफ़ हैं कि जैसा कुछ राज्य अपने तरफ़ से बस भेजकर छात्रों को वापस बुला रहे हैं उससे वो ख़ुश नही हैं. दूसरा वो केंद्र से इस सम्बंध में एक समान नीति बनाने का आग्रह कर ये भी संदेश देना चाहते हैं कि बच्चे हो या प्रवासी मज़दूर अगर वो फंसे हैं तो केंद्र की भी ज़िम्मेदारी बनती है.
लॉकडाउन पर फैसला ले केंद्र
लॉकडाउन की अवधि को बढ़ाने पर नीतीश कुमार ने कहा कि वो केंद्र को समर्थन करते हैं. प्रधानमंत्री जो भी निर्णय लेंगे वो उनके साथ हैं. लेकिन आर्थिक काम काज शुरू होना चाहिए और राज्य में जो कुछ काम काज शुरू हुआ हैं उसके बारे में उन्होंने जानकारी दी. साथ-साथ यह भी कहा कि कैसे पूरे राज्य में घर घर स्क्रीनिंग के काम शुरू होने के बाद नये मरीज सामने आ रहे हैं.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सख्त रुख
कोटा में कोचिंग करने वाले बच्चों को निकालने के मुद्दे पर बोले नीतीश कुमार ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि क्या पांच लोग सड़क पर आकर मांग करने लगेंगे तो सरकार झुक जाएगी? सरकार ऐसे काम करती है? सब संपन्न परिवारों के बच्चे हैं उनको वहां क्या दिक्कत है. दस हजा़र बच्चों को उठा लाए. इससे बाकी राज्यों पर दबाव आ रहा है. राजस्थान की अर्थव्यवस्था को भी नुक़सान हो रहा है.
जरूरतमंदों को दी है एक हजार की सहायता
सीएम ने कहा कि कोटा ही नहीं देश के अन्य हिस्सों में भी बिहार छात्र/छात्रायें पढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में बिहार के लोग जो बाहर फंसे हैं उन्होंने फोन के माध्यम से आपदा प्रबंधन विभाग, स्थानिक आयुक्त के कार्यालय, बिहार भवन नई दिल्ली और मुख्यमंत्री कार्यालय में अपनी समस्याएं बतायीं। अब तक ऐसे एक लाख से अधिक फोन कॉल्स एवं मैसेजेज आ चुके हैं। ऐसे लोगों से फीडबैक लेकर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए काम किए जा रहे हैं। हमलोगों ने राज्य के बाहर फंसे बिहार के मजदूरों एवं जरुरतमंद व्यक्तियों के लिए सहायता राशि के रुप में मुख्यमंत्री विशेष सहायता अंतर्गत 1,000 रुपये देने का निर्णय किया था। इस संबंध में अब तक 25 लाख आवेदन आ चुके हैं, जिनमें से 15 लाख लोगों के खाते में 1000 रुपए की राशि अंतरित की जा चुकी है।