Home खास खबरें आज से शुरू हो रहा है राजगीर महोत्सव, आप सब आइए और पंकज उधास को सुनिए

आज से शुरू हो रहा है राजगीर महोत्सव, आप सब आइए और पंकज उधास को सुनिए

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राजगीर (Rajgir) की वादियों में पंच पहाड़ियों के बीच आज से तीन दिवसीय राजगीर महोत्सव (Rajgir Festival) शुरू होने जा रहा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) महोत्सव का उद्घाटन करेंगे. महोत्सव में जल जीवन हरियाली आकर्षण का मुख्य केंद्र होगा. पंडालों में बाल विवाह पर रोक लगाने को लेकर कई कार्टून भी बनाए गए हैं. राजगीर महोत्सव में मशहूर गजल गायक पद्मश्री पंकज उधास (Ghazal Singer Pankaj Udhas) भी आएंगे.

पद्मश्री पंकज उधास होंगे मुख्य आकर्षण
राजगीर महोत्सव के पहले दिन की शाम में मशहूर गजल गायक पंकज उधास की आवाज से राजगीर की पंच पहाड़ियां झंकृत होंगी। चिट्ठी आयी है…, चांदी जैसा रंग है तेरा… जैसी मशहूर गजलें लोगों को सुनने का मौका मिलेगा। इनके अलावा कई अन्य नामचीन कलाकारों को भी महोत्सव में बुलाया गया है.

और क्या-क्या है खास
महोत्सव में दंगल प्रतियोगिता, तांगा दौड़, सद्भावना मार्च, महिला महोत्सव, नुक्कड़ नाटक, रंगोली के अलावा कई अन्य कार्यक्रम भी होंगे. बच्चों के मनोरंजन के लिए फन-जोन, खाने-पीने के स्टॉल आदि की भी व्यवस्था है. महोत्सव के लिए राजगीर को रंग-बिरंगी लाइट्स से सजाया गया है.

हॉकी मैदान में ग्रामश्री मंडप
हॉकी मैदान जो जापानी मंदिर के पीछे है उसमें ग्रामश्री मंडप बनाया गया है। वहां किसानों को खेती से संबंधित जानकारी दी जायेगी। वहीं खेती में उपयोग होने वाली विभिन्न तरह के उपकरण की प्रदर्शनी होगी। इससे वे जानकारी हासिल कर अपने खेत में बेहतर उपज की सीख ले सकते हैं।

 13 राज्यों के उद्यमी आएंगे
राजगीर महोत्सव में इस बार ग्रामश्री मेला में 148 स्टॉल लगाए जा रहे हैं. ए-ब्लॉक में 30 विभागीय स्टॉल होंगे. इसके अलावा जिला उद्योग केंद्र एवं बिहार राज्य अल्पसंख्यक वित्तीय निगम का भी स्टॉल लगाया गया है. महोत्सव में इस बार 13 राज्यों के स्टॉल लगाए जा रहे हैं, जिसमें बिहार के अलावा पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, झारखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के नामी चीजों के स्टॉल शामिल हैं. डीएम योगेंद्र सिंह व एसपी नीलेश कुमार पूरे महोत्सव की तैयारी का लगातार जायजा ले रहे हैं.

33 साल से चली आ रही है परंपरा
राजगीर महोत्सव की शुरुआत 33 साल पहले 1986 में राजगीर के भीष्म पितामह कहे जाने वाले पूर्व शिक्षा राज्य मंत्री सुरेन्द्र प्रसाद तरुण के प्रयास से की गयी थी। चार अप्रैल 1986 को तत्कालीन मुख्यमंत्री बिंदेश्वरी दुबे, केंद्रीय पर्यटन मंत्री एचकेएल भगत और राज्य पर्यटन मंत्री उमा पांडेय के हाथों महोत्सव की शुरुआत हुई थी। उस समय राजगीर नृत्य महोत्सव के नाम से इसका आयोजन किया गया था। 1989 में इसका नाम राजगीर महोत्सव कर दिया गया। वक्त के साथ इस आयोजन के स्वरूप में काफी बदलाव हुआ है।पहले ये महोत्सव सोन भंडार में शुरू हुआ था। उसके बाद यूथ होस्टल फिर किला मैदान और अब इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर तक पहुंच गया।

ये दिग्गज कलाकार कर चुके हैं शिरकत
1997 के राजगीर महोत्सव में शास्त्रीय नृत्यागना पद्मभूषण सोनल मानसिंह, माधवी मुदगल व कमलिनी ही नहीं बल्कि ड्रीम गर्ल से ख्यात अभिनेत्री हेमा मालिनी आई थीं। वहीं 1998 में विश्वविख्यात बासुरी वादक पंडित हरि प्रसाद चौरसिया, भजन सम्राट अनूप जलोटा व फिल्म अभिनेत्री अर्चना जोगलेकर ने राजगीर महोत्सव का आकर्षण बढ़ाया था। बॉलीवुड अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्रि के अलावे प्रसिद्ध भारतीय कथक नर्तक व शास्त्रीय गायक बिरजू महाराज तथा ओडिसी नृत्यागना संयुक्ता पाणिग्रही ने अपनी नृत्य कला से दर्शकों को लुभाया है। अब तक हिंदी सिनेमा के पा‌र्श्व गायकों में पूर्णिमा, अनूप जलोटा, पंकज उधास, भूपेन हजारिका, गुलाम अली, शान, जसविंदर नरुला, अलका याग्निक, कैलाश खेर आ चुके हैं। 2013 में सुखविंदर सिंह, 2014 में विनोद राठौड़, 2015 में अदनान सामी, 2016 में उदित नारायण, 2017 में हरिहरण, 2018 में अनुराधा पौडवाल ने अपनी जादूई आवाज से राजगीर महोत्सव के मंच को नवाजा है।

ये हैं राजगीर के आकर्षण –
मगध साम्राज्य की पुरानी राजधानी रही राजगीर (राजगृह) का सौंदर्य राजगीर महोत्सव के दौरान और निखर आता है। पांच पहाड़ियों से घिरे इस पुराने शहर में विश्व शांति स्तूप से लेकर घूमने की कई जगहें हैं। ब्रह्माकुंड व सप्तधाराओं में स्नान की विशेष महत्ता है। यहां पर 22 कुंड और 52 धाराएं है। विश्व शांति स्तूप, सोन भंडार, जरासंध का अखाड़ा, बिंबिसार की जेल, नौलखा मंदिर, जापानी मंदिर, बाबा सिद्धनाथ मंदिर, जैन मंदिर, गृद्धकूट पर्वत, लाल मंदिर, घोड़ा कटोरा डैम, वेणुवन, सुरक्षा दीवार, जेठियन बुद्ध पथ, सप्तवर्णी गुफा आदि प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं।

राजगीर के 22 कुंड –
ब्रह्माकुंड, सप्तधारा, व्यास, अनंत, मार्कंडेय, गंगा-यमुना, काशी, सूर्य, चंद्रमा, सीता, राम-लक्ष्मण, गणेश, अहिल्या, नानक, मखदुम, सरस्वती, अग्निधारा, गोदावरी, वैतरणी, दुखहरनी, भरत एवं शालीग्राम कुंड आदि यहां के प्रमुख कुंड मे से एक हैं। इन कुंडों के जल को पवित्र और औषधीय गुणों से युक्त माना जाता है। यहां भ्रमण करने वाले लोग इन कुंडों में स्नान भी करते हैं।

ऐसे पहुंचें राजगीर
पटना से राजगीर करीब 100 किलोमीटर दूर है। आप रेल अथवा सड़क मार्ग का इस्तेमाल कर सकते हैं। पटना जंक्शन से राजगीर के लिए रोजाना चार ट्रेनें खुलती हैं। पहली ट्रेन बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस तड़के 03:10 बजे पटना जंक्शन से खुलती है। यह ट्रेन सबसे कम समय पौने तीन घंटे में सुबह 05.55 बजे राजगीर पहुंचा देती है। इसके बाद श्रमजीवी सुपरफास्ट सुबह 07:15 बजे खुलकर सवा तीन घंटे में, जबकि दानापुर-राजगीर इंटरसिटी सुबह 07:25 में खुलकर करीब सवा चार घंटे में राजगीर पहुंचा देती है। शाम 06:50 बजे पटना जंक्शन से दानापुर-राजगीर मेमू खुलती है, जो सवा चार घंटे का समय लेती है। राजधानी के मीठापुर बस पड़ाव से राजगीर के लिए नियमित बसें खुलती हैं।

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