Home काम की बात नवादा के सांसद ने लोकसभा में उठाया मुद्दा.. लेकिन गडकरी ने सुना दी खरी-खरी

नवादा के सांसद ने लोकसभा में उठाया मुद्दा.. लेकिन गडकरी ने सुना दी खरी-खरी

0 second read
0
1
2,683

नवादा के सांसद चंदन कुमार ने लोकसभा में नवादा में बंद पड़े चीनी मिल का मुद्दा उठाया और इसे पुर्नजीवित करने की मांग की . जिसे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सिरे से खारिज कर दिया ।

क्या है मुद्दा
लोकजनशक्ति पार्टी के नेता और नवादा से चुनकर पहली बार संसद पहुंचे चंदन कुमार ने गुरुवार को लोकसभा में अपनी क्षेत्र की समस्या को उठाया। उन्होंने नवादा में बंद पड़े चीनी मिल का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि निजी कंपनियों द्वारा चीनी मिल शुरू किया गया था। लेकिन बाद में सरकार ने उसका अधिग्रहण कर लिया था. जिसके कुछ दिन बाद सरकार ने भी मिल को बंद कर दिया

मिल को पुर्नजीवित करने की मांग
सूरजभान सिंह के छोटे भाई चंदन सिंह ने नवादा में बंद पड़े चीनी मिलों को पुर्नजीवित करने की मांग की. उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों की परेशानी को देखते हुए चीनी मिल को दोबारा शुरू किया जाना चाहिए

गडकरी ने सुना दी खरी खरी
नवादा के सांसद चंदन कुमार के सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दो टूक शब्दों में कहा कि कुछ भी खोलिए लेकिन चीनी मिल मत खोलिए. उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए समझाया कि उनके क्षेत्र तीन चीनी मिलें चल रही है और कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है ।

चीनी मिल के सामने क्या है दिक्कत
नितिन गडकरी ने कहा कि ब्राजील में चीनी 22 रुपए प्रति किलो मिल रही है. जबकि भारत में सरकार किसानों को 32 रुपए प्रति किलो के हिसाब से दे रही है. जिससे अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है ।

इथेनॉल बनाने की सलाह दी
नितिन गडकरी ने जवाब में कहा कि चीनी बनाने से बेहतर इथेनॉल बनाना है. सदन में उन्होंने बताया कि गन्ना के रसे से इथेनॉल तैयार करने में ज्यादा फायदा है. एक लीटर इथेनॉल के लिए सरकार 60 रुपए दे रही है। इसलिए चीनी मिल फायदे का सौदा नहीं है .

लालू यादव सरकार ने बंद कराई थी मिल
दरअसल, नवादा जिले के वारिसलीगंज में स्थापित चीनी मिल से नवादा, नालंदा ,शेखपुरा ,जमुई और गया तक के लाखों किसान प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए थे और अपने खेतों में उपजाए गए गन्ने की कीमत पाकर घर बनाने, शादी विवाह और बच्चों की पढ़ाई आदि का कार्य बखूबी कर रहे थे। लेकिन 1990 में लालू प्रसाद की सरकार बनने के बाद बिहार के कई चीनी मिल जिसमें वारिसलीगंज चीनी मिल भी शामिल था को घाटा में दिखाकर 1993 में बंद कर दिया गया। जिसके बाद से ये चुनावी मुद्दा रहा है ।

Load More Related Articles
Load More By Nalanda Live
Load More In काम की बात

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

विदेश भागने की फिराक में अनंत सिंह, CID ने जारी करेगा लुक आउट नोटिस

बिहार पुलिस को इस बात का डर सता रहा है कि अनंत सिह नाम बदलकर विदेश भाग सकता है। जिसके बाद …