Home खास खबरें रक्षाबंधन पर महासंयोग.. कितने बजे तक योग, किसे-किस रंग की राखी बांधें और कहानी

रक्षाबंधन पर महासंयोग.. कितने बजे तक योग, किसे-किस रंग की राखी बांधें और कहानी

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भाई-बहन के अटूट प्रेम का त्योहार रक्षाबंधन इस बार विशेष महासंयोग में मनेगा। यह महासंयोग काफी शुभ है। सौभाग्य योग के साथ गज योग का महामिलन हो रहा है। रक्षाबंधन 15 अगस्त को मनाया जायेगा।

कितने से कितने बजे तक है योग
14 अगस्त को ही दिन में 2.46 बजे से पूर्णिमा का संयोग शुरू हो जायेगा और 15 अगस्त को पूर्णिमा तिथि दिन के शाम 4.23 तक रहेगा। यह सत्यनाराण व्रत की पूर्णिमा होगी। सालों बाद यह संयोग बना है। रक्षा सूत्र बंधन का शुभ समय सुबह 5.33 से 8.05 तक है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11.36 से 12.37 तक है। भद्रा काल 14 अगस्त को ही समाप्त हो रहा है।

किस राशि वाले किस रंग का राखी पहनें
इस फेस्टिवल की मान्यता है कि भाई के कलाई पर राखी बांधने का मतलब होता है कि भाई सारी उम्र अपनी बहन की रक्षा करेगा. हमारे जीवन में रंगों का अलग ही मत्हव होता है और ये महत्व राखी वाले दिन तो और खास हो जाता है. अगर ज्योतिष की मानें तो इस दिन अगर राशियों के अनुसार उसी कलर की राखी बांधी जाए तो वह काफी लाभदायक होता है. तो आइए इसक क्रम अनुसार जानते हैं कि किस राशि वाली लड़कियों को कौन- सी कलर की राखी अपने भाई की कलाई पर बांधनी चाहिए.

मेष- लाल और पीला धागा का सूत्र
वृष- सफेद और नीला धागा का सूत्र
मिथुन- हरा और सफेद धागा का सूत्र
कर्क- पीला-हरा सफेद धागा का सूत्र
सिंह- गुलाबी-हरा-पीला धागा का सूत्र
कन्या- हरा-पीला-सफेद धागा का सूत्र
तुला- हरा-सफेद धागा का सूत्र
वृशिचक- गहरा-लाल धागा का सूत्र
धनु- हरा-लाल धागा का सूत्र
मकर- सफेद, आसमानी धागा का सूत्र
कुंभ- पीला, लाल धागा का सूत्र
मीन- सफेद, नीला धागा का सूत्र

रक्षाबंधन की क्या मान्यताएं हैं
रक्षाबंधन को हिंदू माह श्रावण (श्रावण पूर्णिमा) में पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. यह भारत के सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक है. हिंदू मान्यताओं के मुताबिक देवताओं और दानवों के बीच एक युद्ध छिड़ गया था, ये युद्ध 12 वर्षों तक लगातार चला और इस युद्द में दानवों की जीत हुई.दानवों ने देवताओं के राजा-इंद्र के सिंहासन पर कब्जा कर लिया.जब इंद्र युद्ध हार गए, तो उन्होंने अपने आध्यात्मिक गुरु बृहस्पति से सलाह ली. बृहस्पति ने इंद्र को सलाह दी कि वे कुछ मंत्रों का जाप करें जिससे उन्हें सुरक्षा मिले. पूर्णिमा के दिन श्रावण के महीने में मंत्रों के जाप का यह सिलसिला शुरू हुआ. इस दौरान एक धागे को आशीर्वाद के साथ एक छोटे सी धातु के चारों ओर कसकर बांधा गया. जाप के बाद, सुरक्षा आशीर्वाद वाले इस छोटी धातु को भगवान इंद्र की पत्नी, शची, जिसे इंद्राणी के नाम से भी जाना जाता है, ने इंद्र की कलाई पर बांध दिया था. इन आशीषों के कारण, यह कहा गया कि इंद्र को अपनी शक्ति वापस मिली और उन्होंने दानवों को हराया.

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