
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं. वे प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के फॉर्मूले से आगे निकल गए हैं. सीएम नीतीश ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विनिंग फॉर्मूले को अपनाया है और इसके जरिए वोटरों को साधने की कोशिश करेंगे. साथ ही आपको ये भी बताएंगे कि आखिर नमो एप से बेहतर कैसे है सीएम नीतीश का एप
ट्रंप की तरह टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने चुनाव प्रचार में इस तरह की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया था। इस ऐप में वन-वे और टू-वे दोनों तरह से जुड़ने की सुविधा होगी। यानि जब नीतीश को लोगों से संवाद करना होगा तो वे टू-वे कम्यूनिकेशन से जुड़ेंगे और लोगों से फीडबैक लेंगे। इस ऐप के जरिए 10 लाख लोग मुख्यमंत्री का लाइव भाषण देख सकते हैं.
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यूजर फ्रेंडली है एप
ये ऐप यूजर फ्रेंडली है और इसमें किसी तरह का कोई आईडी-पासवर्ड नहीं डालना होगा। 25 लाख से ज्यादा लोगों को मोबाइल पर लिंक भेजा जाएगा। जो लोग ऐप के जरिये नहीं जुड़े पाएंगे, वे जदयू और नीतीश के फेसबुक पेज, ट्विटर और यू-ट्यूब पर जाकर भाषण सुन सकते हैं।
जानिये ऐप (JDUlive.com) की खासियत-
1. फेसबुक और नेटफ्लिक्स लाइव के लिए जिस कंटेंट डिलिवरी नेटवर्क का इस्तेमाल करती है, इस ऐप में उसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है ताकि लाइव स्ट्रीमिंग में दिक्कत न आए।
2. इस ऐप को यूजर फ्रेंडली बनाया गया है और इसके माध्यम से लोगों को मोबाइल पर मैसेज भेजा जाएगा जिसके जरिये लोग सीधा नेताओं से जुड़ सकते हैं।
3. जियो के छोटे स्मार्टफोन पर भी यह ऐप खुल जाएगा और एक क्लिक करते ही 30 सेकेंड के अंदर जदयू के लाइव कार्यक्रम से जुड़ सकते हैं।
4. ऐप पर लोग पार्टी को सुझाव दे सकते हैं जो पार्टी के एडमिन को मिलेगा। इस सुझाव के आधार पर जदयू चुनाव को लेकर रणनीति तैयार करेगी। सभी वोटर इसमें अपना सजेशन दे सकते हैं।
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नमो ऐप से कैसे अलग है जदयू का यह ऐप-
1. नमो ऐप में टू-वे कम्यूनिकेशन नहीं है जबकि जदयू के इस ऐप के जरिये वन-वे और टू-वे दोनों तरह से संवाद कर सकते हैं। आसान शब्दों में कहा जाए तो नमो ऐप पर लोग नेताओं का भाषण तो सुन सकते हैं लेकिन अपनी बात नहीं कह सकते। वहीं, जदयू के इस ऐप पर टू-वे कम्यूनिकेशन भी हो सकता है और लोग अपनी बात नेताओं को कह सकते हैं।
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2. जदयू के ऐप में एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। इसमें कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क (वीडियो लाइव करने के लिए सर्वर) के लिए वाउजर का इस्तेमाल होता है जो फेसबुक और नेटफ्लिक्स जैसी कंपनियां इस्तेमाल करती हैं। नमो ऐप पर होने वाले लाइव स्ट्रीमिंग से ज्यादा अच्छी क्वालिटी जदयू के ऐप पर दिखेगी।
3. नमो ऐप में मैसेंजर मॉड्यूल नहीं है जबकि जदयू के ऐप में यह सुविधा है। मैसेंजर मॉड्यूल मतलब ऐप के जरिये लोगों तक मैसेज भेजने की सुविधा। जदयू के ऐप से लोगों को लाइव स्ट्रीमिंग का सीधा मैसेज भेजा जा सकता है जो नमो ऐप में नहीं है।