Home काम की बात अच्छी खबर- नालंदा में खुलेगा एक थोक और 3 खुदरा मछली मंडी

अच्छी खबर- नालंदा में खुलेगा एक थोक और 3 खुदरा मछली मंडी

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नालंदा जिलावासियों के लिए एक अच्छी खबर है । नालंदा जिला में जल्द ही एक थोक मछली मंडी और तीन खुदरा मछली मंडी का निर्माण होगा। ताकि नालंदा समेत आसपास के जिलों में मछली पालन को बढ़ावा दिया जा सके। इसके लिए मत्सय पालन विभाग ने प्रस्ताव भेजा है। जिसके तहत जिले के तीनों अनुमंडल बिहारशरीफ,राजगीर और हिलसा में खुदरा मछली मंडी खुलेगी।

बिहारशरीफ में थोक और खुदरा मंडी
केंद्र सरकार की योजना के तहत बिहार राज्य में 9 थोक और 29 खुदरा मछली मंडी का निर्माण होना है। जिसके तहत बिहारशरीफ में एक थोक मछली मंडी और हिलसा,राजगीर और बिहारशरीफ में खुदरा मछली मंडी खोलने का निर्णय लिया गया है । इसके लिए मछली व्यवसायियों के साथ बैठक की गई है। मछली व्यवसायों से बेहतर स्थल का चयन करने की बात की गई। माना जा रहा है कि जल्द ही जमीन का चयन कर लिया जाएगा।

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खुदरा मंडी में क्या क्या होगा
खुदरा मछली मंडी में कम से कम 10-15 दुकानें बनाई जाएंगी। प्रत्येक दुकान में 10X20 का चबूतरा होगा। इसके अलावा जिन्दा मछली के लिए हॉज, बर्फ वाली मछली के लिए अलग व्यवस्था होगी। इसके अलावा शौचालय के साथ-साथ गाड़ियों के आने जाने के लिए अलग से रास्ता बनाया जाएगा

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नालंदा में है भारी क्षमता
नालंदा जिला में एकमात्र मछली मंडी बिहारशरीफ में है। जिसके कारण वजह से किसान छोटे स्तर पर मछली पालन का व्यवसाय नहीं कर पाते। डीएफओ का कहना है कि स्थानीय स्तर पर मछली की मांग पूरी नहीं हो पाती है। इस वजह से लोग मजबूरी में आंध्रा और बाहर की मछलियां खाते हैं। मंडी खुलने से ये समस्या दूर होगी।

रोजाना 130 क्विंटल मछली की खपत
नालंदा जिला थोक मछली विक्रेता संघ के अध्यक्ष सुनील कुमार का कहना है कि रोजाना यहां 130 क्विंटल मछली की खपत होती है। जिसमें 60 क्विंटल आंध्र, 30-35 क्विंटल बंगाल और 35-40 क्विंटल लोकल मछली की खपत है। उन्होंने कहा कि मंडी बनाने से ज्यादा मत्स्य पालकों एवं विक्रेताओं को बढ़ावा मिलेगा।

बाहर की मछलियों पर भी लगेगी रोक
मछली व्यवसायियों का कहना है कि जिले में मछली के कम उत्पादन और ज्यादा मांग की वजह से लोकल मछली महंगा होता है । लेकिन जब स्थानीय स्तर पर मछली का उत्पादन बढ़ेगा तो बाहर की मछलियों के दाम घटेंगे। जिसका लाभ स्थानीय लोगों को मिलेगा । साथ ही आंध्रा और बंगाल से आने वाली मछलियों पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि लोकल मछली 250-300 रुपए प्रति किलो बिकता है लेकिन बंगाल से आने वाली मछली मात्र 160-200 रुपए किलो उपलब्ध हो जाता है।

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