Home बिहार शरीफ सावधान… बिहारशरीफ में जानलेवा डेंगू ने पसारे पैर, लक्षण और बचाव.. जानिए

सावधान… बिहारशरीफ में जानलेवा डेंगू ने पसारे पैर, लक्षण और बचाव.. जानिए

0

बिहारशरीफ में रहने वालों के लिए सचेत करने वाली खबर है। शहर में डेंगू ने पैर पसराना शुरू कर दिया है। बिहारशरीफ में रोजाना डेंगू के नए-नए मरीजों के मिलने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। बिहारशरीफ के वार्ड संख्या 34 के हाजीपुर मोहल्ले में कई लोगों के बीमार होने की खबर है। शुरुआत में सामान्य-सा लगनेवाला ये बुखार देरी या गलत इलाज से जानलेवा साबित हो सकता है।

कैसे और कब होता है डेंगू 

डेंगू मादा एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। इन मच्छरों के शरीर पर चीते जैसी धारियां होती हैं। ये मच्छर दिन में, खासकर सुबह काटते हैं। डेंगू बरसात के मौसम और उसके फौरन बाद के महीनों यानी जुलाई से अक्टूबर में सबसे ज्यादा फैलता है क्योंकि इस मौसम में मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां होती हैं। एडीज इजिप्टी मच्छर बहुत ऊंचाई तक नहीं उड़ पाता।

कैसे फैलता है 
डेंगू बुखार से पीड़ित मरीज के खून में डेंगू वायरस बहुत ज्यादा मात्रा में होता है। जब कोई एडीज मच्छर डेंगू के किसी मरीज को काटता है तो वो उस मरीज का खून चूसता है। खून के साथ डेंगू वायरस भी मच्छर के शरीर में चला जाता है। जब डेंगू वायरस वाला वो मच्छर किसी और इंसान को काटता है तो उससे वो वायरस उस इंसान के शरीर में पहुंच जाता है, जिससे वो डेंगू वायरस से पीड़ित हो जाता है।

कब दिखती है बीमारी 
काटे जाने के करीब 3-5 दिनों के बाद मरीज में डेंगू बुखार के लक्षण दिखने लगते हैं। शरीर में बीमारी पनपने की मियाद 3 से 10 दिनों की भी हो सकती है।


कितने तरह का होता है डेंगू
यह तीन तरह का होता है
1. क्लासिकल (साधारण) डेंगू बुखार 
2. डेंगू हैमरेजिक बुखार (DHF) 
3. डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS) 

इन तीनों में से दूसरे और तीसरे तरह का डेंगू सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। साधारण डेंगू बुखार अपने आप ठीक हो जाता है और इससे जान जाने का खतरा नहीं होता लेकिन अगर किसी को DHF या DSS है और उसका फौरन इलाज शुरू नहीं किया जाता तो जान जा सकती है। इसलिए यह पहचानना सबसे जरूरी है कि बुखार साधारण डेंगू है, DHF है या DSS है।

लक्षण क्या-क्या 

साधारण डेंगू बुखार 
ठंड लगने के बाद अचानक तेज बुखार चढ़ना
सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना
आंखों के पिछले हिस्से में दर्द होना, जो आंखों को दबाने या हिलाने से और बढ़ जाता है
बहुत ज्यादा कमजोरी लगना, भूख न लगना और जी मितलाना और मुंह का स्वाद खराब होना
गले में हल्का-सा दर्द होना
शरीर खासकर चेहरे, गर्दन और छाती पर लाल-गुलाबी रंग के रैशेज होना

क्लासिकल यानि साधारण डेंगू बुखार करीब 5 से 7 दिन तक रहता है और मरीज ठीक हो जाता है। ज्यादातर मामलों में इसी किस्म का डेंगू बुखार होता है।

डेंगू हैमरेजिक बुखार (DHF) 
नाक और मसूढ़ों से खून आना
शौच या उलटी में खून आना
स्किन पर गहरे नीले-काले रंग के छोटे या बड़े चिकत्ते पड़ जाना

डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS) 

इस बुखार में DHF के लक्षणों के साथ-साथ ‘शॉक’ की अवस्था के भी कुछ लक्षण दिखाई देते हैं। जैसे :
मरीज बहुत बेचैन हो जाता है और तेज बुखार के बावजूद उसकी स्किन ठंडी महसूस होती है।
मरीज धीरे-धीरे होश खोने लगता है।
मरीज की नाड़ी कभी तेज और कभी धीरे चलने लगती है। उसका ब्लड प्रेशर एकदम लो हो जाता है।

नोट : डेंगू से कई बार मल्टी ऑर्गन फेल्योर भी हो जाता है। इसमें सेल्स के अंदर मौजूद फ्लूइड बाहर निकल जाता है। पेट के अंदर पानी जमा हो जाता है। लंग्स और लिवर पर बुरा असर पड़ता है और ये काम करना बंद कर देते हैं।

प्लेटलेट्स की भूमिका 
आमतौर पर तंदुरुस्त आदमी के शरीर में डेढ़ से दो लाख प्लेटलेट्स होते हैं। प्लेटलेट्स बॉडी की ब्लीडिंग रोकने का काम करती हैं। अगर प्लेटलेट्स एक लाख से कम हो जाएं तो मरीज को फौरन हॉस्पिटल में भर्ती कराना चाहिए। अगर प्लेटलेट्स गिरकर 20 हजार तक या उससे नीचे पहुंच जाएं तो प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। 40-50 हजार प्लेटलेट्स तक ब्लीडिंग नहीं होती। लेकिन 20 हजार से कम होने पर ब्लीडिंग होने लग जाता है।

डेंगू से कैसे बचें 
डेंगू से बचने के दो ही उपाय हैं। एडीज मच्छरों को पैदा होने से रोकना। एडीज मच्छरों के काटने से बचाव करना। इसलिए रात को सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें और ऐसे कपड़े पहने, जिससे शरीर का ज्यादा-से-ज्यादा हिस्सा ढका रहे।

मच्छरों को पैदा होने से रोकने के उपाय
– घर या ऑफिस के आसपास पानी जमा न होने दें, गड्ढों को मिट्टी से भर दें, रुकी हुई नालियों को साफ करें।
– अगर पानी जमा होेने से रोकना मुमकिन नहीं है तो उसमें पेट्रोल या केरोसिन ऑयल डालें।
– डेंगू के मच्छर साफ पानी में पनपते हैं, इसलिए पानी की टंकी को अच्छी तरह बंद करके रखें।

-बिहारशरीफ नगर निगम ने मच्छरों के खात्मे के लिए शहर में फिर से दवा का छिड़काव यानि फॉगिंग शुरू कर दी है ।

 

सबसे जरूरी बात

इन दिनों बुखार होने पर सिर्फ पैरासिटामोल (क्रोसिन, कैलपोल आदि) लें। एस्प्रिन (डिस्प्रिन, इकोस्प्रिन) या एनॉलजेसिक (ब्रूफिन, कॉम्बिफ्लेम आदि) बिल्कुल न लें। क्योंकि अगर डेंगू है तो एस्प्रिन या ब्रूफिन आदि लेने से प्लेटलेट्स कम हो सकती हैं और शरीर से ब्लीडिंग शुरू हो सकती है। साथ ही कोई एंटी बॉयोटिक न लें ।झोलाछाप डॉक्टरों के पास न जाएं।  Dexamethasone(जेनरिक नाम) का इंजेक्शन और टैब्लेट तो बिल्कुल न लें। अक्सर झोलाछाप मरीजों को इसका इंजेक्शन और टैब्लेट दे देते हैं, जिससे मौत भी हो सकती है।

बचाव ही इलाज है

किसी भी तरह के डेंगू में मरीज के शरीर में पानी की कमी नहीं आने देनी चाहिए। उसे खूब पानी और बाकी तरल पदार्थ (नीबू पानी, छाछ, नारियल पानी आदि) पिलाएं ताकि ब्लड गाढ़ा न हो और जमे नहीं। साथ ही, मरीज को पूरा आराम करना चाहिए। आराम भी डेंगू की दवा ही है।

Load More Related Articles
Load More By Nalanda Live
Load More In बिहार शरीफ

Leave a Reply

Check Also

नालंदा में होटल मालिक और ठेकेदार की फिल्मी स्टाइल में हत्या.. जानिए पूरा मामला

नालंदा जिला में अपराधियों ने बड़ी वारदात को अंजाम दिया है. बाइक सवार चार बदमाशों ने गोली म…