
आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव रविवार को बिहारशरीफ के दौरे पर आए। जहां उन्होंने बाबा मखदूम साहब की दरगाह जाकर चादर चढ़ाई और मन्नत मांगी। इसके बाद टाउन हाई स्कूल में आयोजित जनसभा में उन्होंने चाचा नीतीश कुमार पर जमकर भड़ास निकाली। तेज प्रताप यादव ने कहा कि उनकी लड़ाई आरएसएस और बीजेपी से है न कि जेडीयू से। तेजप्रताप यादव का कहना था कि एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार को खूब ठगा तो दूसरी तरफ ध्वस्त कानून व्यवस्था वाले बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कॉमा में मस्त पड़े हैं।

नालंदा से करेंगे 2019 का शंखनाद
तेजप्रताप यादव ने कहा कि 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव का शंखनाद नालंदा की धरती पर से ही किया जाएगा। लालू प्रसाद यादव ने भी पहले यहीं से शुरूआत की थी। तेजप्रताप यादव ने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि नालंदा नीतीश का जिला है लेकिन हम कहते हैं कि अब यह मेरा जिला है। यहां के लोग हमारे हैं। उन्होंने चाचा नीतीश कुमार को पलटू राम भी बताया। तेज प्रताप यादव ने कहा कि नीतीश कुमार ने हमारे पिता के नाम पर मांगे और सत्ता पर काबिज हुए लेकिन 18 महीने बाद ही उन्होंने पलटी मारकर बीजेपी के गोद में जा बैठी।

अपनों की नहीं आई याद
तेजप्रताप यादव जब रविवार को बिहारशरीफ पहुंचे तो कार्यकर्ताओं ने उनका जबरदस्त स्वागत किया। उसके बाद मखदूम साहब के मजार और बाबा मणिराम के अखाड़ा भी गए। जहां उन्होंने मन्नत मांगी और बाबा का आशीर्वाद लिया। लेकिन इस दौरान उन्हें अपनों की याद तक नहीं आई। तेजप्रताप यादव को अपनी पार्टी के सिपाही की याद भी नहीं आई।
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जिससे नालंदा जिला के आरजेडी कार्यकर्ताओं में निराशा भी है। आरजेडी के कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि तेजप्रताप यादव को नालंदा जिला राजद किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष कल्लू मुखिया से मुलाकात करनी चाहिए थी। उनका हाल जानना चाहिए था क्योंकि पिछले महीने ही बदमाशों ने उनके बेटे की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या चाचा पर बरसने के चक्कर में तेजप्रताप यादव अपनों को भूल गए