महाराष्ट्र,गुजरात और यूपी को पछाड़कर नंबर वन बना बिहार !

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बिहार वासियों के लिए गर्व की बात है कि उनका बिहार अब कुछ मामलों में नंबर है। महाराष्ट्र, गुजरात जैसे विकसित राज्य से बिहार कई मामलों में बहुत आगे है। भले ही प्रति व्यक्ति आय में बिहार पिछड़ा है । लेकिन शुद्ध पेय जल यानि नल-जल की सुविधा में बिहार नंबर वन बन गया है ।

नंबर वन बिहार
देश में सबसे ज्यादा बिहार के ग्रामीण परिवारों के पास नल-जल की सुविधा प्राप्त है। बिहार में एक करोड़ 57 लाख ग्रामीण घरों में नल से जल की आपूर्ति हो रही है। दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र है, जहां एक करोड़ तीन लाख परिवारों को नल से जल की आपूर्ति की जा रही है। इस बात का उल्लेख भारत सरकार द्वारा जारी जल जीवन मिशन-हर घर जल के आंकड़े में किया गया है ।

आबादी में तीसरे नंबर पर बिहार
जनसंख्या के मामले में बिहार का स्थान देश में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बाद तीसरे नंबर पर है। लेकिन नल के जरिए से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की सुविधा प्राप्त घरों की संख्या सबसे अधिक बिहार में है। हालांकि बिहार के पंचायती राज और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के द्वारा राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में एक करोड़ 65 लाख घरों में नल-जल का कनेक्शन दिया गया है। लेकिन कई लाभुकों के द्वारा आधार का नंबर नहीं दिये जाने के कारण भारत सरकार के आंकड़ें में 8 लाख कम लाभुक बिहार के दिख रहे हैं। आधार नंबर के साथ ही लाभुकों के आंकड़े केंद्र के पोर्टल पर अपलोड होते हैं।

नीतीश की दूरदर्शिता का परिणाम
दरअसल, ये सब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदर्शिता का नतीजा है। बिहार में साल 2016 में नल जल योजना की शुरुआत हुई थी। जिसके जरिए गांवों में हर घर में नल से जल पहुंचाया गया। इसके तीन साल बाद केंद्र की मोदी सरकार ने साल 2019 में इसे देशभर में लागू करने की घोषणा की और फिर काम शुरू किया।

आंकड़े क्या कहते हैं
केंद्र सरकार द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में एक करोड़ 72 लाख 20 हजार के परिवारों को नल-जल का कनेक्शन देना है। इनमें 91.11 प्रतिशत उपलब्धि हासिल कर ली गई है। वहीं महाराष्ट्र में एक करोड़ 46 लाख ग्रामीण परिवारों को इसका कनेक्शन देना है, जिनमें 70.88 प्रतिशत उपलब्धि हासिल हो सकी है।

राज्य – नल-जल कनेक्शन
बिहार : 1.57 करोड़
महाराष्ट्र : 1.03 करोड़
गुजरात : 87 लाख
आंध्रप्रदेश : 54 लाख
मध्य प्रदेश : 49 लाख
कर्नाटक : 47 लाख
ओडिशा : 41 लाख
उत्तर प्रदेश : 36 लाख

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