CAG की रिपोर्ट में खुलासा.. नालंदा में हुआ ‘महाघोटाला’?

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देश के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नालंदा जिले में कई योजनाओं में बड़ी धांधली हुई है। इसके अलावा नल जल योजना में भी धांधली की बात कही गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नालंदा जिले धांधली का आलम ये है कि कागजों पर ही ईंट बिछ गया और पैसे की निकासी हो गई। इतना ही नहीं कागज पर ही जलमीनार बन गए है और घोटालेबाजों ने पैसे निगल लिए। कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि उनकी टीम ने योजनाओं के कार्यान्यवन की पुष्टि करने के लिए मौके पर पहुंची तो वहां जाकर घोटाले के बारे में पता चला है।

अफसरों के फर्जी साइन से निकासी
कैग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि धुरगांव ग्राम पंचायत में योजना संख्या 23/ 15 -16 के तहत 2 लाख 73 हजार रुपये खर्च कर ईंट सोलिंग का काम कराने का दावा किया गया है। कैग की टीम ने जब मौके पर जाकर मुआयना किया तो वहां ईंट सोलिंग का कोई काम नहीं दिखा। इस मामले के सामने आने पर जिले के अफसरों ने कहा कि योजना में गलती से उस जगह का नाम टाइप हो गया था। कैग को जांच में एक ऐसी फाइल मिली है जिसमें दर्ज जिले के सारे काम केवल कागजों पर हुए हैं, उनका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं है। यहां तक कि इस फाइल पर अफसर के भी फर्जी साइन किए गए हैं।

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सार्वजनिक समरसेबल ट्यूबबेल को बना लिया निजी
वहीं, एक और मामले में नगर पंचायत इस्लामपुर में 5 लाख 16 हजार के खर्च से वार्ड संख्या 2 में 50 घरों में शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए लघु समरसिबल टैंक लगाने का दावा किया गया था। दरअसल, जिस जमीन पर समरसेबल ट्यूबबेल लगा है उसे गांव के ही एक शख्स ने अपना बता दिया। उसके बाद उस शख्स ने वहां से गांव के दूसरे लोगों को पानी भरने से मना कर दिया। इसके बाद कैग दोबारा से इस मामले की असलियत निकालने में लगे हैं।

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कागजों पर ट्यूबबेल दे रहा पानी, जमीन पर नहीं
इसी तरह ग्राम पंचायत अजयपुर में योजना संख्या 5/15- 16 के तहत 62000 रुपये की लागत से ट्यूबवेल लगाना था। नालंदा जिले के अफसरों ने कागजों पर इस जिले में ट्यूबेल लगा भी दिया। कैग की टीम जब मौके पर पहुंची तो यहां भी उन्हें चौंकाने वाली सच्चाई देखने को मिली। वहां ट्यूबबेल जैसी कोई चीज थी ही नहीं।

जलमीनार के नाम पर लूट
कैग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कई ग्राम पंचायतों में जलमीनार बनाने के नाम पर रकम खर्च हुए हैं, लेकिन कैग की टीम को ज्यादातर जगहों पर जलमीनार नहीं दिखे। अपनी रिपोर्ट को पुष्ट करने के लिए कैग ने तस्वीरें भी शामिल की है। गौर करने वाली बात ये है कि कैग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नालंदा में विकास कार्यों के नाम पर बड़े स्तर पर धांधली हुई है।
(( सौ. नवभारत टाइम्स))

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