
नालंदा के डीएम दफ्तर पर एक बार फिर नीलामी की तलवार लटकी है। कोर्ट ने एक बार फिर से बिहारशरीफ स्थित नालंदा कलेक्ट्रेट की नीलामी के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने नालंदा कलेक्ट्रेट के 5 हजार 177 डिसमिल जमीन और बिल्डिंग की नीलामी के आदेश दिए हैं। इसके लिए नोटिस चिपका दिया गया है। ये आदेश बिहारशरीफ व्यवहार न्यायालय के सब जज पांच मंजूर आलम ने सुनाया है।
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पहले 26 जून को होना था नीलाम
इससे पहले बिहारशरीफ व्यवहार न्यायालय ने 26 जून को नीलामी के आदेश दिए थे। लेकिन सरकारी वकील की याचिका पर नीलामी टल गई थी। कोर्ट ने नालंदा के डीएम को नीलामी की संपत्ति का मूल्यांकन कर रिपोर्ट देने को कहा था। सरकारी वकील दशरथ प्रसाद ने पुनर्विचार याचिका दाखिल कर कहा था कि कलेक्ट्रेट और एसडीओ ऑफिस की जिस 5 एकड़ 77 डिसमिल जमीन की नीलामी का आदेश दिया गया है। उस संपत्ति का मूल्य 50 करोड़ से ज्यादा है। ऐसे में पूरी संपत्ति को नीलाम करना न्याय हित में नहीं है। जिसपर याचिका कर्ता मोहम्मद इलियास के वकील दीपक कुमार ने कहा था कि कलेक्ट्रेट की उस 80 डिसमिल जमीन को नीलाम किया जाए जिसपर डीएम और एसपी दफ्तर बने हैं। जिसके बाद कोर्ट ने इसपर डीएम से एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी थी।

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क्या है पूरा मामला जानिए
याचिका के मुताबिक साल 2007 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत कतरीसराय के दरवेशपुरा गांव से मैरा वरीठ तक सड़क का निर्माण कराया गया था। जिसमें ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों ने मिलकर याचिकाकर्ता मो. इलियास की रैयती जमीन पर जबरन मिट्टी भर दिया था। जिससे जमीन पर लगी फसल और पेड़ को भी नष्ट हो गए थे। मोहम्मद इलियास ने इसकी शिकायत डीएम समेत अन्य अधिकारियों से की गई थी, लेकिन इसके बावजूद मुआवजा नहीं दिया गया । जिसके बाद मोहम्मद इलियास ने कोर्ट की शरण ली। मोहम्मद इलियास ने 79 लाख 92 हजार रूपए मुआवजा की मांग की थी। कोर्ट में चले लंबे कानूनी लड़ाई के बाद 28 अगस्त 2014 को इलियास के पक्ष में फैसला सुनाया। जिसमें बिहार सरकार को 12 फीसदी ब्याज के साथ छह महीने में मुआवजे के भुगतान का आदेश सुनाया। कोर्ट के आदेश के बावजूद मोहम्मद इलियास को मुआवजा नहीं मिला। इसके बाद फिर से मोहम्मद इलियास कोर्ट की शरण में गया और याचिका दाखिल की। सब जज 5 मंसूर आलम ने मामले की सुनवाई करते हुए छह अप्रैल 2018 को जमीन सहित कलेक्ट्रेट भवन की नीलामी के आदेश दिए थे। इसके तहत एक जून को इश्तेहार चिपका दिया गया था और 18 जून 2018 के भुगतान करने का निदेश दिया। लेकिन इस अवधि तक मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किया गया। जिसके बाद कलेक्ट्रेट की नीलामी के लिए 26 जून की तिथि निर्धारित की गयी थी। लेकिन सरकारी वकील की अपील पर इसे स्थगित कर दिया गया था। लेकिन अब कोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई है। अब या तो जिला प्रशासन इसके खिलाफ हाईकोर्ट की शरण ले या तो भुगतान करे ।