
आसाराम को उसके कुकर्मों की सजा मिल गई है । अब उसकी पूरी जिंदगी सलाखों के पीछे कटेगी। लेकिन क्या आपको पता है कि डेढ़ सौ साल तक जिंदा रहना चाहता था? वो अपना सेक्स पावर को बढ़ाने के लिए क्या क्या करता था ? इसका खुलासा कभी आसाराम के राजदार रहे अमृत प्रजापति ने अपनी मौत से पहले खुलासा किया था । अमृत प्रजापति ने बताया ता कि आसाराम डेढ़ सौ साल तक जिंदा रहना चाहता था और हर वक्त कमसिन लड़कियों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश में लगा रहता था । अपनी मर्दानगी बढ़ाने के लिए आसाराम दुलर्भ जड़ी बूटियों का सेवन करता रहता था और स्वर्ण भस्म पीता था।
क्या होता है स्वर्ण भस्म..जानिए
स्वर्ण भस्म यानि की सोने का चूर्ण। स्वर्ण भस्म को आयुर्वेद में हजारों सालों से दवाई के रूप में प्रयोग किया जाता रहा है। ये शरीर में ताक़त देने के साथ साथ मानसिक शक्ति में सुधार करने वाली औषधि कहलाती है। आयुर्वेद में स्वर्ण जैसी मूल्यवान धातु की रासायनिक विधि से भस्म बनाई जाती है । जो की सोने की ही तरह बहुत मूल्यवान है। ऐसा माना जाता है कि स्वर्ण भस्म को बल बढ़ाने के लिए एक टॉनिक की तरह दिया जाता रहा है। जिसके सेवन करने से यौन शक्ति (Sexual power) बढ़ता है। स्वर्ण भस्म का वृद्धावस्था में प्रयोग करने से शरीर के सभी अंगों को ताकत देता है। आसाराम के पूर्व बैद्य अमृतप्रजापति ने अपनी मौत से पहले ये खुलासा किया था कि बलात्कारी आसाराम अपनी सेक्स पावर बढाने के लिए दूध में स्वर्ण भस्म मिलाकर पीता था।
कौन-कौन सी दुलर्भ जड़ी बूटियों का सेवन करता था आसाराम
आसाराम अपनी मर्दानगी बढ़ाने के लिए दूर्लभ जड़ी बूटियां खाता था। आसाराम जड़ी बूटियों का एक अनोखा मिश्रण बनाता था। जिसमें कामिनी मर्दन, अश्वगंधा, शिलाजीत और मकरध्वज जैसी दवाएं खाता था । मकर ध्वज बूटी दुर्लभ जड़ी बूटियों और रस भस्मों से बनाई जाती है । अश्वगंधा का इस्तेमाल करने से इंसान लंबे समय तक जवान बना रहता है।
यौन शक्ति बढ़ाने के लिए शिलाजीत भी खाता था आसाराम
आसाराम के राजदार रहे मरहूम अमृत प्रजापति के मुताबिक आसाराम उच्च कोटी के शिलाजीत का सेवन करता था । इसके पीछे उसका मकसद सिर्फ और सिर्फ अपनी मर्दानगी को बढ़ाना होता था। आपको बता दें कि शिलाजीत एक विशेष प्रकार की औषधि होती है जो तारकोल की तरह काली और गाढ़ी होती है । ऐसा माना जाता है कि इसके सेवन से सेक्स पावर बढ़ती है। वैदिक दृष्टि से ऐसा माना जाता है कि शिलाजीत पत्थरों से बनता है । सूर्य की गर्मी से पहाड़ों की धातु पिघलती है उससे शिलाजीत बनता है। शिलाजीत कड़वा होता है। शिलाजीत चार प्रकार का होता है। स्वर्ण, रजत, तांब्र और लौह होता है । यानि वो जवान बने रहने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाता था ।