
नालंदा जिला में कोरोना संक्रमण एक बार फिर तेजी से फैल रहा है. संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जिला प्रशासन सड़क पर बिना मास्क लगाए घूमने वाले आम लोगों का चालान काटती है और उससे जुर्माना वसूलती है. लेकिन अगर सरकारी दफ्तर में काम करने वाले ही सरकारी बाबू ही मास्क न लगाएं तो इनका चालान कौन काटेगा. अधिकारी अपने कर्मचारियों पर ही नियम लागू नहीं करवा पा रहे हैं. सरकारी दफ्तरों में इसका घोर उल्लंघन हो रहा है
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क्या है पूरा मामला
मंगलवार को हिलसा अनुमंडल कार्यालय में अधिकांश कर्मी बिना मास्क के काम करते दिखे। दूसरी ओर डीएसपी कार्यालय का भी यही हाल है। कर्मचारी बिना मास्क लगाए काम में मशगूल थे। वहीं शारीरिक दूरी से भी उन्हें कोई वास्ता नहीं दिखा। इस संदर्भ में जब अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि कार्यालय में रोटेशन के आधार पर कर्मियों को बुलाया जा रहा है। मास्क लगाना सबके लिए अनिवार्य है। पकड़े जाने पर दंडित किए जाएंगे।
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आम लोगों के लिए चेकिंग अभियान
जिले में आपको रोजाना कहीं ना कहीं जिला प्रशासन और पुलिस के लोग मास्क की चेकिंग करते दिख जाएंगे. जो लोग मास्क नहीं पहने रहते हैं उनका 50-50 रुपए का चालान काटा जाता है. मंगलवार को चंडी थाना के जैतीपुर में बिना मास्क के घूम रहे 25 लोगों का 50-50 रुपए का चालान काटा गया। कई टेम्पो ड्राइवरों पर भी जुर्माना किया गया और उन्हें हिदायत दी कि फिजिकल डिस्टेंस का पालन करते हुए सवारी बैठाएं।
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सबसे बड़ा सवाल
लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि दीपक तले अंधेरा क्यों है? क्यों जहां सारे अधिकारी बैठते हैं उनके दफ्तर में ही कर्मचारी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन क्यों नहीं कर रहे हैं और क्यों मास्क नहीं पहनते हैं. क्या डीएम साहब ऐसे कर्मचारियों पर कार्रवाई करेंगे. आपको यहां बता दें कि हिलसा अनुमंडल के एसडीओ और डीएसपी दोनों कोरोना संक्रमित हो चुके थे. हालांकि अब उनका तबादला हो गया है.